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मनरेगा से जुड़ेंगी दूसरे विभागों की परियोजनाएं

Tue, 16 Dec 2014 06:24 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ जयपुर
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को और बेहतर बनाने के लिए इसे दूसरे विभागों की परियोजनाओं से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इससे मनरेगा में सामग्री मद के लिए राशि की कमी नहीं रहेगी और स्थाई परिसम्पत्तियों का निर्माण हो सकेगा। जयपुर के एक पांच सितारा होटल में मंगलवार को मनरेगा को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई।
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चौधरी ने बताया कि बैठक में सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यही रहा कि मनरेगा के तहत अच्छे और स्थाई काम हों, इसके लिए दूसरे विभागों की योजनाओं को इससे जोड़ा जाना जरूरी है। मनरेगा के तहत सामग्री मद में 40 प्रतिशत राशि ही काम में ली जा सकती है। ऐसे मे गुणवत्तापूर्ण काम नहीं हो पाते। इस कमी को दूसरे विभागें की योजनाओं से जोड़कर दूर किया जा सकता है।

बैठक में रोजगार देने में आयु सीमा तय किए जाने का सुझाव भी आया है। चौधरी ने कहा कि उनका मंत्रालय अभी ऐसी दो बैठकें और करेगा। इनमें से एक बैठक छह जनवरी को त्रिवेन्द्रम में होगी, जिसमें दक्षिण व पश्चिम के राज्य आएंगे और इसके बाद 30 जनवरी को पटना में बैठक होगी, जिसमें उत्तर-पूर्व और पूर्वी क्षेत्र के राज्य आएंगे। इन सब राज्यों से मिले सुझावों के आधार पर इस योजना को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा।
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मनरेगा के तहत मजदूरी के भुगतान में देरी के सवाल पर सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत इस बार 34 हजार करोड़ का बजट था और उनका मंत्रालय 25 हजार 500 करोड रुपए रिलीज कर चुका है, इसलिए हमारी तरफ से देरी नहीं है। उन्होंने मनरेगा के तहत स्किल डवलपमेंट को जोडने की जरूरत को भी माना। बैठक में उत्तर भारत के नौ राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों से केन्द्रीय मंत्री ने चर्चा की। राजस्थान और पंजाब को छोड कर अन्य राज्यों के मंत्री कोहरे के कारण शामिल नहीं हो सके। हालांकि अधिकारी सभी राज्यों के थे।
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