कोलगेट के तूफान में घिरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विपक्ष ने चौतरफा घेरेबंदी शुरू कर दी है। पूर्व कोल सचिव पीसी पारिख के आरोपों से उठे सियासी भूचाल के बाद भाजपा प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए मैदान में उतर आई है।
वामदलों ने भी आरोपों को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री की भूमिका पर यूपीए सरकार से सफाई मांगी है। भाजपा व माकपा ने उम्मीद जताई है कि अदालत पूर्व कोल सचिव के आरोपों का संज्ञान लेगी।
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कोलगेट पर प्रधानमंत्री फिर से विपक्ष के निशाने पर हैं। चुनावी माहौल में विपक्ष ने इस मसले पर सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। इसे महाघोटाला बताते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि अफसरों को डराने के लिए सरकार उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा रही है।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि जिस अफसर ने कोल ब्लॉकों का आवंटन नीलामी से करने का सुझाव दिया, उसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि जिसके हस्ताक्षरों से आवंटन हुआ, सरकार उसे बचाने की कोशिश में जुटी है। उन्होंने सीबीआई पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के साथ ही दसारी नारायण राव से पूछताछ तक नहीं की गई।
पूर्व वित्तमंत्री व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पारिख की यह टिप्पणी आश्चर्यजनक नहीं है कि प्रधानमंत्री को कोल ब्लॉक आवंटन मामले में साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारिख को इस बात का भी खुलासा करना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने कोल मंत्रालय संभालते हुए कितने ब्लॉक आवंटित किए।
सिन्हा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने कांग्रेस मुख्यालय से मिली चिट के आधार पर कोल ब्लॉक आवंटन के लिए कोयला मंत्रालय को निर्देश दिए। सिन्हा ने कहा कि कोल ब्लाक आवंटन की अंतिम मंजूरी देने वाला व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच सकता है और उन लोगों पर अधिक जिम्मेदारियां कैसे डाली जा सकती हैं जिन्होंने सिर्फ सिफारिशें की थीं।
माकपा ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि पूर्व कोल सचिव ने जो कुछ कहा है, उससे नई बातें सामने आ गई हैं। इसलिए सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की विस्तृत जांच कराने की जरूरत है।