एक ओर हिंसाग्रस्त इराक से बड़ी संख्या में भारतीय नर्सें स्वदेश लौट रही हैं तो दूसरी ओर केरल की एक नर्स को वापस इराक लौटना पड़ रहा है।
अपनी आर्थिक मजबूरियों के चलते सोनिया जोमोन दक्षिणी इराक के नसीरिया काम पर लौट रही हैं। सोनिया केरल के कोटायम जिले में रहती हैं। उनकी दो बेटियां हैं। सोनिया उन्हें छोड़कर जाने को मजबूर हैं।
सोनिया ने बताया, "इराक से आने के समय मैं इतनी चिंतित नहीं थी। अब ज्यादा चिंता सता रही है।"
कर्ज का दबाव
सोनिया 10 जून को भारत छुट्टी पर आई थीं। लगभग उसी वक्त आईएसआईएस के जिहादियों ने उत्तरी इराक के मोसुल और तिकरित पर कब्जा कर लिया था।
वो कहती हैं, "मेरे दोस्त वापस चले गए हैं। उन्होंने बताया है कि वहां हालात सामान्य है।" पति जोमोन थॉमस ने बीबीसी को बताया, "मैं डरा हुआ हूं, लेकिन यदि मुश्किलें न होतीं तो सोनिया कतई वापस न जाती।"
दूसरी ओर सोनिया का कहना है, "डर तो लग रहा है, फिर भी हिम्मत बांध रखी है क्योंकि दक्षिणी इराक में उत्तरी इराक जैसी कोई समस्या नहीं है। आर्थिक समस्याएं गंभीर हैं इसलिए मुझे लौटना ही होगा।"
सोनिया ने नसीरिया में 10 महीने काम करने के बाद एजेंट का कर्ज तो चुकता कर दिया है। लेकिन अपनी पढ़ाई के लिए, लिए गए चार लाख रुपयों का कर्ज अभी बाकी है। वो कहती हैं, "लीबिया या कनाडा में अच्छी नौकरी मिल सकती है लेकिन कैश अकाउंट बैलेंस दिखाना पड़ेगा। फिर एजेंट को 5-10 लाख देने पड़ेंगे।"
शांतिपूर्ण हालात
सोनिया के हालात नसीरिया में काम करने वाली एक और नर्स सिंधू जैसे हैं। सिंधु जून के अंतिम हफ्ते में इराक वापस लौट गई थीं।
ये वो वक़्त था जब तिकरित के हिंसाग्रस्त इलाके में फंसे भारतीय कामगार बगदाद स्थित दूतावास और केरल के मुख्यमंत्री को तत्काल इराक से निकालने की गुहार लगा रहे थे।
सोनिया की तरह सिंधु को भी नसीरिया से दोस्तों ने हालात शांतिपूर्ण बताते हुए लौट आने को कहा था। सिंधु ने सोनिया को रविवार को संदेश भेजा था कि यहां सब ठीक है।
साफ है कि कर्ज का दबाव सोनिया और सिंधु जैसी नर्सों को खतरा मोल लेकर भी इराक वापस लौटने को मजबूर कर रहा है।