बारहवीं पंचवर्षीय योजना में समान उद्देश्य वाली कल्याणकारी योजनाओं को अलग-अलग मंत्रालय अपने हिसाब से नहीं चला सकेंगे। सामाजिक कल्याण से जुड़ी सभी योजनाओं को तमाम मंत्रालयों के बीच बांटा जाएगा। संबंधित मंत्रालय जरूरत के मुताबिक दूसरे मंत्रालय से मदद ले सकता है, लेकिन योजना के अंतिम परिणाम के लिए उसे ही जिम्मेदारी उठानी होगी।
सरकार का मानना है कि ऐसा करने से कल्याणकारी योजनाओं के पहले से बेहतर परिणाम नजर आएंगे। फिलहाल अलग-अलग मंत्रालयों के जरिये कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके खर्च के अनुपात में बेहतर परिणाम नहीं नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस निर्णय के आधार पर सबसे पहले श्रम मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के समान उद्देश्य वाली योजनाओं की समीक्षा की जा सकती है।
फिलहाल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम मंत्रालय दोनों की ओर से व्यवसायिक प्रशिक्षण के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ऐसे में यह समीक्षा की जाएगी कि महिलाओं के व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को अलग से कार्यक्रम चलाने की जरूरत है या नहीं।
माना जा रहा है कि श्रम मंत्रालय ही महिलाओं के व्यवसायिक प्रशिक्षण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की जिम्मेदारी भी उठाएगा। दूसरी ओर ऐसी योजनाएं, जिनमें जन सहभागिता की जरूरत है लेकिन संबंधित विभाग या मंत्रालय उसे ठीक तरीके से नहीं चला पा रहा है तो ऐसे कार्यक्रमों को चलाने की जिम्मेदारी सामाजिक कल्याण से सीधे ताल्लुक रखने वाले मंत्रालय को दी जा सकती है।