कैबिनेट में भारी फेरबदल कर सियासी संतुलन बनाने के आत्मविश्वास से लवरेज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने समय से पहले लोकसभा चुनाव की आशंकाओं को खारिज कर दिया है। अपनी नई कैबिनेट को भविष्य की चुनौतियों के लिहाज से अहम बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें अनुभव के साथ युवाओं को मौका दिया गया है।
वहीं, यूपीए सरकार के इस आखिरी फेरबदल में भी राहुल गांधी के कैबिनेट में शामिल नहीं होने को लेकर प्रधानमंत्री को मलाल जरूर है। मगर संगठन को मजबूत बनाने के राहुल के एजेंड़े को भी पीएम उतना ही जरूरी मानते हैं। अब राहुल के इस सरकार में आने की संभावना खत्म हो गई है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने खुद साफ कर दिया कि यह आम चुनाव से पहले का आखिरी फेरबदल था।
कैबिनेट फेरबदल के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में जल्द आम चुनाव की अटकलों को नकारा। उन्होंने कहा कि चुनाव अपने समय पर यानी 2014 में ही होंगे। एक सवाल के जवाब में पीएम ने कहा कि संभवत: यह अंतिम फेरबदल है।
सरकार के इस फेरबदल के संदेश के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जाहिर तौर पर काफी सारी चुनौतियां हैं और यह बदलाव इन चुनौतियों से निपटने का रोडमैप है। कैबिनेट में युवा चेहरों को आगे करने के सवाल पर पीएम ने कहा कि इसमें अनुभव और युवा दोनों का मिश्रण है। विभागों के बंटवारे में भी इसका ध्यान रखा गया है।
राहुल गांधी के मंत्री नहीं बनने के बारे में पीएम ने कहा कि अगर राहुल कैबिनेट में शामिल होते तो उन्हें खुशी होती, मगर अभी वह संगठन के कामों में ज्यादा व्यस्त हैं और पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं। यह भी जरूरी है। अंबिका सोनी और मुकुल वासनिक सरीखे सरकार के बडे़ चेहरों के संगठन में जाने की वजह के बारे में पीएम ने कहा कि पार्टी को भी ऐसे लोगों की जरूरत है, जो संगठन को मजबूत कर सकें। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार से संगठन में जा रहे हैं वे वहां भी उतने ही उपयोगी साबित होंगे।