उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस में जारी उठापटक खत्म होने के संकेत नहीं है। हरीश रावत के मुख्यमंत्री पद संभालने के हफ्ते भर के भीतर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज ने रावत पर परोक्ष रूप से हाईकमान को ब्लैकमेल कर पद हथियाने का आरोप लगाया है।
महाराज का कहना है कि रावत ने खुद के साथ नाइंसाफी का रोना रोकर कुर्सी हासिल की है। जबकि हकीकत यह है कि एक व्यक्ति के साथ कथित नाइंसाफी को तवज्जो देकर पूरे गढ़वाल के लोगों की उपेक्षा की गई है।
उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के फैसले से नाखुश महाराज ने मुख्यमंत्री से चेतावनी के अंदाज में कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को अहमियत देते हुए पद नहीं बांटे गए तो लोकसभा चुनाव में हाईकमान से जीत के लिए गए उनके दावे धराशायी हो जाएंगे।
सतपाल महाराज ने हाईकमान से जताया असंतोष
उत्तराखंड में विजय बहुगुणा के उत्तराधिकारी की दौड़ में हरीश रावत से मात खाए सतपाल महाराज ने बुधवार को यहां अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वास्तव में रावत की ताजपोशी राज्य और विशेषकर गढ़वाल के लोगों के मुकाबले एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा को ज्यादा तवज्जो दिया जाना है।
इस फैसले को लेकर हाईकमान से भी अपना असंतोष जाहिर करते हुए महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति को कथित हक दिलाने को महत्व दिया जाता है तो फिर यह सवाल भी लाजिमी है कि गढ़वाल मंडल की लाखों की जनता के साथ नाइंसाफी का क्या होगा?
रावत पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला करते समय इस तथ्य की अनदेखी भी हुई कि विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने के हाईकमान के फैसले के बाद भी हरीश रावत ने उन्हें कई दिनों तक शपथ नहीं लेने दिया था। फिर भी रावत को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया गया, उनके समधि को विधानसभा अध्यक्ष तो समर्थक को राज्यसभा का टिकट दिया गया। महाराज ने कहा कि इतने देने के बावजूद जब उनका हक मारा जाता है तो फिर गढ़वाल के लोगों के साथ तो घोर नाइंसाफी हुई है।
कोटा सिस्टम के बजाय काबिलियत को मिले तवज्जो
मुख्यमंत्री रावत पर सदैव गढ़वाल की उपेक्षा का आरोप ठोकते हुए महाराज ने कहा कि वे पहले भी गढ़वाल को सम्मान देने का वादा करते रहे हैं मगर हकीकत में कुछ किया नहीं है और वे अब तक हरिद्वार तक ही सीमित रहे हैं। मगर इस बार वे उम्मीद करते हैं कि रावत मुख्यमंत्री के नाते गढ़वाल और कुमाऊं के बीच बनी दूरी को पाटेंगे।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री को कोटा सिस्टम से मंत्री बनाने की जगह काबिलियत को तवज्जो देना चाहिए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पद बांटना होगा। अन्यथा लोकसभा सीट जीतने का हाईकमान को भरोसा देकर मुख्यमंत्री बने रावत की उम्मीद धराशाई हो जाएगी।
उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन में हुई अनदेखी को लेकर हाईकमान से भी अपनी नाराजगी का इजहार करने में महाराज ने हिचक नहीं दिखाई। उनका कहना था कि हिमाचल प्रदेश से लोकसभा की चार सीटें हैं तो वहां से केंद्र में दो कैबिनेट मंत्री बनाए गए तो फिर उत्तराखंड को केवल एक मंत्री ही क्यों?