आगामी आम चुनाव को धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता का रंग देने की कोशिश में जुटी कांग्रेस की रणनीति पर भाजपा ने पानी फेरने की योजना बनाई है।
इसके तहत पार्टी यूपीए सरकार के नौ साल के कुशासन और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के सुशासन को जनता के बीच ले जाएगी।
भाजपा नहीं चाहती कि कांग्रेस पूरी लड़ाई को सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता के दायरे में बांधे। इसलिए पार्टी कुशासन बनाम सुशासन के नारे के साथ चुनावी मैदान में कूदेगी।
रणनीति में कोई कमी न रह जाए, इसलिए पार्टी ने यूपीए सरकार के नौ साल की नाकामियों का दस्तावेज तैयार करने का जिम्मा वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे और रविशंकर प्रसाद की अगुवाई वाली टीम को सौंपा है।
साथ ही कांग्रेस की रणनीति की काट के लिए गुजरात के विकास मॉडल की जगह वाजपेयी के विकास मॉडल को सामने रखने की रणनीति बनाई गई है।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पार्टी का नया चेहरा बनने के बाद कांग्रेस ने सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता का चुनावी दांव खेलने की रणनीति बनाई है।
इस रणनीति के तहत मोदी पर ताबड़तोड़ हमला कर पार्टी ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। उधर, भाजपा ने कांग्रेस की रणनीति को भांपते हुए इस मुद्दे पर बीती दो बैठकों में गंभीर चर्चा की।
खासतौर से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि अगर कांग्रेस अपने दांव में सफल हो गई तो यूपीए सरकार के दौरान हुए भयंकर भ्रष्टाचार, महंगाई और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था का मुद्दा हाशिये पर चला जाएगा।
यही कारण है कि पार्टी ने सबसे पहले मोदी के गुजरात मॉडल को पेश करने की योजना की जगह वाजपेयी के विकास मॉडल को पेश करने की रणनीति बनाई है।
नई रणनीति के तहत कांग्रेस की योजना की काट के लिए आम चुनाव के समर में कुशासन बनाम सुशासन के नारे के साथ कूदने पर सहमति बनी है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक इसके तहत यूपीए सरकार के दोनों कार्यकालों की नाकामियों का न केवल दस्तावेज तैयार किया जाएगा, बल्कि इसे मतदाताओं के बीच भी उठाया जाएगा।
इसी दौरान भाजपा यूपीए सरकार के कार्यकाल की तुलना पूर्ववर्ती राजग सरकार से करेगी। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की टीम वाजपेयी सरकार की उपलब्धियों का दस्तावेज तैयार करेगी।