काशी की बुनियादी समस्याओं के निराकरण में सहयोग के लिए अमेरिका, जर्मनी और जापान के बाद अब यूरोपीय देश नीदरलैंड ने हाथ बढ़ाया है। इसके प्रतिनिधियों का एक दल तीन नवंबर को नई दिल्ली आएगा और शहरी विकास मंत्रालय के सभागार में आयोजित गोलमेज बैठक में शिरकत करेगा।
इस बैठक में बैठक में काशी की लिक्विड और सॉलिड वेस्ट के निस्तारण और उसमें आने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में नीदरलैंड ने भी सहयोग की पेशकश की है। इसके लिए नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र को ही अपना पहला कार्यक्षेत्र बनाने की इच्छा जाहिर की है।
इसी क्रम में आगामी तीन नवंबर को शहरी विकास मंत्रालय के सभागार में नीदरलैंड के प्रतिनिधियों के साथ गोलमेज बैठक होगी। इसमें काशी के लिक्विड वेस्ट (सीवर, नाली-नाला) और सॉलिड वेस्ट (कूड़ा) के निस्तारण की समस्याओं पर दो घंटे तक चर्चा की जाएगी।
नीदरलैंड के प्रतिनिधि इन समस्याओं के निराकरण के सुझाव देंगे। शहरी विकास मंत्रालय से वाराणसी नगर निगम प्रशासन को जो संकेत मिले हैं उनके अनुसार, नीदरलैंड के विशेषज्ञों द्वारा बताए गए उपायों को काशी के सिटी सेनिटेशन प्लान में शामिल किया जाएगा।
नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि तीन नवंबर को शहरी विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के सभागार में नीदरलैंड के प्रतिनिधियों के साथ वाराणसी के लिक्विड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर गोलमेज बैठक आयोजित है। नगर निगम के प्रतिनिधि के तौर पर जलकल के जीएम बीके पांडेय इसमें शामिल होंगे।