छह साल से जारी कानूनी लड़ाई अब अंत की ओर बढ़ चली है। इसमें भावनात्मक दलीलें भी दी गईं और डीएनए टेस्ट की भी चर्चा हुई। मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी से जुड़ा है।
एक तरफ रोहित शेखर दावा कर रहे थे कि वह एनडी तिवारी के बेटे हैं और उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए। दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता बार-बार कह रहे थे कि ऐसा कुछ नहीं है।
रोहित और उनकी मां ने तस्वीरों समेत कई सबूत सामने रखे, मामला अदालत तक गया और फिर शुरू हुई ऐसी लड़ाई, जिस पर देश भर की निगाह थी। लेकिन अब एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को बड़ा खुलासा कर दिया है।
एनडी ने माना रोहित को बेटा
भावनात्मक दलीलों और डीएनए टेस्ट वाली छह साल लंबी कानूनी जंग के बाद कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता एनडी तिवारी ने आखिरकार मान लिया है कि जो नौजवान उन्हें कोर्ट तक घसीट ले गया, वो उनका ही बेटा है।
34 वर्षीय रोहित शेखर और उनकी मां उज्ज्वला शर्मा को पहली बार स्वीकारते हुए एनडी तिवारी ने एक चैनल से बातचीत में कहा, "मैं स्वीकार करता हूं कि रोहित शेखर मेरे बेटे हैं। डीएनए टेस्ट ने भी साबित किया है कि वह मेरे बायोलॉजिकल बेटे हैं।"
रविवार रात को तिवारी ने रोहित को अपने घर बुलाया और कई साल में पहली बार उनसे बातचीत की। तिवारी ने कथित तौर पर उनसे कहा कि वह लड़ते-लड़ते थक चुके हैं।
अब एनडी को परिवार पर गर्व
एनडी तिवारी ने रोहित को अपना बेटा स्वीकार करने के साथ-साथ इस परिवार को लेकर अपना रुख भी पूरी तरह बदल दिया है। 89 वर्षीय नेता ने कहा, "मुझे इस बढ़िया परिवार के साथ रिश्ता रखने पर गर्व महसूस हो रहा है।"
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का पदभार संभाल चुके एनडी तिवारी अपने बेटे से कानूनी जंग लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गए और उसके बाद तय किया कि अब वो सभी एक परिवार की तरह बैठ सकते हैं।
रोहित शेखर ने साल 2008 में तिवारी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा था कि वह सिर्फ यह चाहते हैं कि उनके पिता उन्हें बेटा स्वीकार करे। तिवारी ने रोहित की बर्थडे पार्टी में शिरकत की और बचपन में उनके साथ खेले भी।
मैं नहीं चाहता कोई और ये सब झेलेः रोहित
दिल्ली उच्च न्यायालय अब भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है, लेकिन रोहित का कहना है कि उन्हें जो चाहिए था, अब मिल चुका है। उन्हें यहां तक पहुंचने में लंबा वक्त लगा है।
साल 2012 में तिवारी को दिल्ली उच्च न्यायालय ये चेतावनी मिलने के बाद पैटरनिटी टेस्ट से गुजरना पड़ा था। कोर्ट का कहना था कि अगर जरूरत पड़े, तो पुलिस यह जांच जबरन भी करा सकती है।
रोहित ने कहा, "जिससे मैं और मेरी मां गुजरी हैं, वो जख्म, वो दर्द... मैं नहीं चहाता कि कोई और इन सभी चीजों से गुजरे। मुझे उम्मीद है कि हम जख्म भर पाएंगे।"
पिता के साथ वक्त गुजारने की चाहत
रोहित शेखर का कहना है कि इस कानूनी जंग के बीच में उन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है और क्रोनिक इनसोमनिया भी है। यानी रात में सोते वक्त उन्हें काफी दिक्कत रहती है।
उन्होंने स्वीकार किया कि पति का स्वीकार किया जाना, सही दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा, "ये जख्म जाएंगे नहीं, भले में ऐसा ऊपर से दिखाऊं। लेकिन अब मैं सिर्फ अपने पिता के साथ वक्त गुजारना चाहता हूं। हमारे मामले ने उदाहरण पेश किया है और उम्मीद है कि उन लोगों को इससे मदद मिलेगी, जो ऐसे ही दौर से गुजरे हैं।"
यह पूछने पर कि क्या वो अपने नए बेटे के साथ ज्यादा वक्त गुजारना चाहेंगे, एनडी तिवारी ने जवाब में कहा, "क्यों नहीं?" जाहिर है, अब दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गई है।
हाई कोर्ट ने खारिज की थी अर्जी
खास बात यह है कि एनडी तिवारी और रोहित शेखर के बीच सहमति बनने से दो दिन पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व राज्यपाल की वो याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने पैटरनिटी मामले में मध्यस्थता की मांग की थी।
2008 से यह जंग लड़ रहे तिवारी ने अर्जी दाखिल करते हुए कहा था कि वह मध्यस्थता के जरिए 'सौहार्द्रपूर्ण समाधान' की संभावनाएं खंगालना चाहते हैं, ताकि न्याय हो सके।
27 जुलाई, 2012 को उच्च न्यायालय ने इस मामले में डीएनए रिपोर्ट पढ़ी थी, जिसके मुताबिक यह साबित हुआ कि एनडी तिवारी ही शेखर के बायोलॉजिकल पिता हैं।