भाजपा ने दो साल पहले ऐलान किया था कि लोकसभा चुनाव में वह उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की तरह प्रत्याशियों के नाम घोषित कर देगी।
अब दो साल तो दूर भाजपा को दो माह पहले भी प्रत्याशियों के नाम तय करना मुश्किल हो रहा है। खासतौर पर पार्टी नेतृत्व को बुजुर्ग और वरिष्ठ नेताओं की सीटों को लेकर दुविधा में है।
मुश्किल में भाजपा
इसके बावजूद अब पार्टी की कोशिश है कि 22 मार्च तक अधिकतर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए जाएं। हालांकि माना जा रहा है कि प्रत्याशियों के नाम घोषित करने का सिलसिला अंतिम समय तक चलता रहेगा।
आम आदमी पार्टी के उदय के बाद भाजपा पर इस बार साफ सुथरे और युवा उम्मीदवार उतारने का दबाव भी है। हालांकि जिताऊ उम्मीदवार तलाश रही भाजपा को अब दमदार दलबदलुओं से भी परहेज नहीं है।
425 सीटों पर लड़ेगी भाजपा चुनाव
इधर नरेंद्र मोदी की लहर के चलते पार्टी में इस बार टिकटार्थियों की संख्या भी बढ़ गई है। पार्टी इस बार 425 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इसलिए इस बार उसे ज्यादा उम्मीदवार तलाशने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
पार्टी का एक बड़ा वर्ग लगातार दबाव बना रहा है कि मोदी उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से चुनाव लड़ें, ताकि उत्तर प्रदेश और बिहार में भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल जाए। लेकिन इस क्षेत्र से मौजूदा सांसद डॉ मुरली मनोहर जोशी सीट छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
संघ चाहता है राज्यसभा से जाएं जोशी और आडवाणी
पार्टी उन्हें कानपुर अथवा नैनीताल से लड़ाने की सोच रही है, लेकिन नैनीताल में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी खम ठोक रहे हैं। संघ चाहता रहा है कि जोशी के अलावा लालकृष्ण आडवाणी राज्यसभा जाएं। लेकिन दोनों ही चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
हिमाचल प्रदेश में शांता कुमार को मैदान में उतार कर साफ हो चुका है कि पार्टी बुजुर्ग नेताओं की टिकट देगी। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लिए भी सुरक्षित सीट तलाशी जा रही है।
मोदी के कारण बढ़ी टिकटार्थियों की तादाद
गाजियाबाद में आप पार्टी की दमदार मौजूदगी देख भाजपा राजनाथ को लखनऊ से लड़ाने पर विचार कर रही है। इसी तरह संघ परिवार के एजेंडे में प्रमुख तौर पर रहे अयोध्या से भी पार्टी को जिताऊ प्रत्याशी की तलाश है।
भाजपा ने कल्याण सिंह को चार सीटें दी हैं, लेकिन कल्याण सिंह जो नाम सुझा रहे हैं उन्हें भाजपा जीतने लायक नहीं मान रही है।