आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के बाद अब रेत माफिया के खिलाफ शुरू की गई उनकी मुहिम का असर होता दिख रहा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सोमवार को देश भर में नदियों से बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि खनन के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी जरूरी होगी।
ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध बालू खनन से राज्य सरकारों को लाखों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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हालांकि याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में यमुना तथा उसकी सहायक नदियों में होने वाले अवैध खनन का मामला उठाया था, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इसे पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। पीठ ने राज्यों से अवैध खनन मामले में 14 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
एनजीटी बार एसोसिएशन ने अवैध खनन को रोकने के चलते गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम दुर्गा शक्ति के निलंबन को आधार बनाते हुए ट्रिब्यूनल में याचिका दी थी।
सरकारी तंत्र की भी मिलीभगत
याचिका में कहा गया था कि बड़े पैमाने पर नदियों में अवैध खनन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। ऐसी गतिविधियों में सरकारी तंत्र की पूरी मिलीभगत रहती है।
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निचले स्तर के कर्मचारी तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध किए जाने पर उन्हें उत्पीड़ित किया जाता है। दुर्गा शक्ति का निलंबन तथा एक अन्य व्यक्ति की दिन दहाड़े घर में घुसकर गोली मारे जाने की घटना अभी हाल ही में हुई है।
पहले पीठ ने यमुना, गंगा, हिंडन, चंबल, गोमती व अन्य नदियों में अवैध बालू खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया, लेकिन बाद में संशोधित आदेश जारी करते हुए कहा कि नदियों से अवैध खनन का मुद्दा पूरे देश के लिए अहम है।
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एनजीटी ने आदेश में कहा है कि खनन के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय या राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से मंजूरी लेनी होगी। इसके बिना देश भर में कोई भी व्यक्ति, कंपनी या प्राधिकार नदियों से बालू खनन का कार्य नहीं कर सकेगा।
कम लागत में अंधाधुंध कमाई
अवैध खनन कम लागत में ही बड़ी कमाई का धंधा है। जहां सिर्फ एक डंपर या ट्रैक्टर-ट्राली लेकर कुछ मजदूरों के जरिए नदियों से खनन कराया जा सकता है।
खनन का खेल
उत्तर प्रदेश में प्रमुख तौर पर गंगा, यमुना, गोमती, केन, बेतवा, चंबल, राप्ती नदियों से हो रहा है बालू खनन।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा
--यमुना और हिंडन से हो रहा खनन।
--नौ लाख टन बालू पिछले एक साल में निकाली गई।
--नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अलावा दिल्ली, हरियाणा और यूपी में भेजी जाती है बालू।
--बिल्डरों और रेत माफिया का होता है गठजोड़।
--रोजाना निकलते हैं 350 ट्रक और डंपर।
--7 टन बालू आती है एक डंपर में।
--4000 से 5000 रुपये आती है एक ट्रक बालू निकालने की लागत।
--यही एक ट्रक बालू बाजार में 20 से 25 हजार रुपये तक की बिकती है।
--2000 से 3000 रुपये आती है एक ट्रैक्टर ट्रॉली बालू निकालने की लागत।
--बांदा में बाबू सिंह कुशवाहा का बालू खनन के खेल में है दबदबा।