वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव कारखाने में तैयार नया मालवाहक इंजन विजय बुधवार से भारतीय पटरियों पर दौड़ने लगेगा।
वर्तमान मालवाहक इंजनों से ज्यादा क्षमता व गति वाला विजय इंजन में ड्राइवर के लिए एसी केबिन के साथ पहली बार इंजन में ही शौचालय की भी व्यवस्था की गई है। रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को वाराणसी पहुंचकर इसे कारखाने से रोल आउट करेंगे।
रेलवे बोर्ड के अनुसार विजय नामक यह डीजल इंजन सामान्य मालवाहक इंजनों से लगभग दो मीटर अधिक लंबा होगा। 'विजय' लंबी रेल गाड़ियों तथा मालवाहक ट्रेनों के साथ 100 किमी की रफ्तार तक दौड़ सकेगा जबकि वर्तमान इंजनों की अधिकतम रफ्तार पचास से साठ किमी प्रति घंटा ही है। ऐसा माना जा रहा है कि डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यह इंजन सफलतापूर्वक दौड़ेगा।
वर्तमान में मालगाड़ियों के लिए बनने वाले डीजल इंजनों के निर्माण पर 4.38 करोड़ रुपये का खर्च आता है लेकिन विजय के निर्माण पर 4.17 करोड़ का ही खर्च आया है।
सुरक्षा की दृष्टि से इस इंजन को अधिक उपयोगी बनाया गया है। लंबी ड्यूटी को देखते हुए ड्राइवर के लिए केबिन को एयरकंडीशन बनाया गया है। इस इंजन में ड्राइवर को सामने व साइड में दृश्यता भी पुराने इंजनों से अधिक होगी।