भाजपा अपने प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की सियासी ‘चमक’ बरकरार रखने के लिए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ज्यादा इस्तेमाल नहीं करेगी।
मोदी कर्नाटक के चुनाव प्रचार में मात्र एक दिन ही हिस्सा लेंगे। मोदी रविवार को कर्नाटक में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। कर्नाटक के बाद भाजपा पूरी तरह से लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुट जाएगी।
कर्नाटक से मिल रहे संकेतों से भाजपा को इस चुनाव के नतीजों से ज्यादा उम्मीद नहीं हैं। यही वजह है कि मिशन 2014 के तहत देशभर में घूम रहे मोदी को भाजपा कर्नाटक में चुनाव प्रचार लिए नहीं भेज रही है।
भाजपा को कर्नाटक में विपरीत नतीजे आने पर मोदी की धमक व चमक दोनों पर आंच आने का खतरा है, जबकि पार्टी उनकी छवि का लोकसभा चुनाव में ज्यादा उपयोग करना चाहती है।
भाजपा के एक नेता का कहना था कि पार्टी को भय है कि मोदी को कर्नाटक में ज्यादा घुमाने पर भी यदि चुनाव नतीजे खराब रहे तो उनका जादू भी उसी तरह गायब होने लगेगा जैसा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हुआ था।
कर्नाटक चुनाव के बाद भाजपा देशभर की प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र की समीक्षा करेगी और उसके आधार पर प्रत्याशियों का चयन करेगी। चुनाव प्रबंधन व प्रत्याशियों के चयन के लिए सभी राज्यों की कोर कमेटियों की पार्टी हाईकमान के साथ बैठकें होंगी।
अभी तक उत्तर प्रदेश और बिहार की बैठकें हो पाई हैं। भाजपा सभी संसदीय क्षेत्रों में बूथ स्तर तक की कमेटियां बनाने में लगी है। इसके साथ ही मई के पहले सप्ताह से गांव-गांव, घर-घर चलो अभियान भी शुरू करने की योजना है। इस अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है।