भाजपा ने नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंप दी है, लेकिन उनके लिए इसे कांटों का ताज माना जा रहा है। अब मोदी के सामने एक नहीं, बल्कि ढेर सारी सियासी चुनौतियां हैं।
केंद्र की सत्ता से पिछले नौ साल से बाहर भाजपा को दोबारा सिंहासन पर बैठाना मोदी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
गुटबाजी
हालांकि कई गुटों में बंटी भाजपा के सहारे नरेंद्र मोदी की यह राह बहुत आसान नहीं है। इसलिए मोदी को सबसे पहले भाजपा को खेमेबाजी से बाहर निकालकर सभी को एकजुट करना होगा।
हालांकि पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन कहते हैं कि मोदी हर मोर्चे पर सफल होंगे, क्योंकि वे कांग्रेस को गुजरात में लगातार धूल चटाते रहे हैं।
आडवाणी की नाराजगी
नरेंद्र मोदी को वरिष्ठ पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी की नाराजगी को भी दूर करना होगा। अभी तक वे गुजरात की सीमा के भीतर ही सियासी पारी खेलते रहे हैं, लेकिन अब उन्हें पूरे देश में अपनी काबिलियत साबित करनी होगी।
संगठन
चुनाव में पार्टी की नैया पार लगाने के लिए भाजपा को संगठन को भी दुरुस्त करना होगा। यह भी साफ है कि केंद्र की सत्ता पाने के लिए भाजपा को एनडीए का विस्तार करना होगा, लेकिन मोदी के नाम पर भाजपा का सहयोगी दल जद (यू) अब भी सहमत नहीं है।
सहयोगी दल
दिल्ली की सत्ता पाने के लिए भाजपा को सहयोगी दलों की जरूरत है और इससे पहले उसे आगामी लोकसभा चुनाव में कम से कम 180 सीटें जीतनी होंगी।
यह भी साफ है कि यदि आगामी चुनाव में भाजपा के अनुकूल नतीजे नहीं आए तो खुद भाजपा के नेता ही मोदी की लोकप्रियता के गुब्बारे की हवा निकाल देंगे।