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जानिए, और क्या-क्या बढ़ाएगी मोदी सरकार?

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रेल किराये की पहली डोज की कड़वाहट खत्म हो, इससे पहले केंद्र सरकार ने कई और डोज देने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे और सपने पुरानी बातें हो गईं, नई सरकार महंगाई का महाबम फोड़ने वाली है।
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भारतीय रेल के इतिहास की सबसे बड़ी बढ़ोतरी के एलान के बाद सरकार ने आम आदमी की रसोई पर निगाह गड़ाई है। आगामी बजट में एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी की घोषणा की जा सकती है।

पेट्रोल, उर्वरक, सिगरेट और हवाई यात्रा की कीमतें भी अपने 'अच्छे दिनों' का इंतजार कर रही हैं। तैयार रहिए, महंगाई का महाबम फूटने वाला है।

पहली कड़वी डोज पड़ी 14.2 फीसदी महंगी

मोदी सरकार की पहली डोज बहुत ही कड़वी है। भारतीय रेल के इतिहास में अब तक सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई है। यात्री किराए में 14.2 प्रतिशत और माल भाड़े में 6.5 फीसदी किराया बढ़ाया गया है। बढ़ा हुआ किराया आगामी 25 जून से लागू होगा।

इस फैसले के अनुसार यात्री किराये में 10 फीसदी सीधे वृद्धि की गई है। जबकि 4.2 फीसदी की बढ़ोत्तरी (एफएसी) फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेंट के तहत की गई है।

25 जून अथवा बाद की तारीखों में यात्रा के लिए पहले से जारी किए जा चुके टिकटों पर यात्रा करते समय ट्रेन में टीटीई बढ़ा हुआ किराया वसूलेंगे।

मासिक पास के लिए करना होगा दुगना भुगतान

रेलवे के अनुसार अब सेकंड क्लास मासिक पास के लिए यात्रियों को दोगुना भुगतान करना होगा। अब कुल 30 सिंगल यात्रा के बराबर किराया देना होगा जबकि अभी तक यह केवल 15 सिंगल यात्रा के बराबर लिया जा रहा था।

प्रथम श्रेणी के पास के लिए सेकंड क्लास के पास का चार गुना भुगतान करना होगा। मासिक पास के लिए किराये का यह आकलन बढ़ी हुई दरों के आधार पर ही किया जाएगा।

मालभाड़े में बढ़ोतरी लाएगी महंगाई का तूफान

मोदी सरकार ने माल भाड़े में बढ़ोतरी भी घोषणा की है। मालभाड़े में 25 जून से 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला लिया गया है।

इसके अलावा कम दूरी (100 किमी) के भाड़े पर मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया गया है। रेलवे ने न्यूनतम दूरी की सीमा भी 100 किमी से बढ़ाकर 125 किमी कर दी है। माल भाड़े में बढ़ोतरी के बाद सब्जियों, फलों और खाद्य पदार्थों की ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

इसके ‌अतिरिक्‍त स्टील, लौह अयस्क, और कोयला समेत कई महत्वपूर्ण चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

मंत्रीजी का कहना, नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल की कीमतें

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियां पेट्रोल के दाम बढ़ाने का फैसला कर सकती हैं।

यह बढ़ोतरी एक से डेढ़ रुपये के करीब होने का अनुमान है। हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फिलहाल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित बताते हुए पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि से इनकार किया है।

दरअसल, इराक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल का भाव बढ़कर 106 डॉलर से बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

विशेषज्ञों का कहना, बढ़ाने पड़ेंगे पेट्रोल के दाम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 60 के स्तर पर रही, तो कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल एक डॉलर की बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल का दाम 30 पैसे बढ़ाना पड़ेगा।

इस हिसाब से पेट्रोल के दाम 1.50 रुपये बढ़ने की आशंका है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम इससे ज्यादा भी बढ़ाने पड़ सकते हैं।

वहीं, कच्चा तेल महंगा होने से डीजल की कीमतों में होने वाली 50 पैसे की मासिक मूल्य वृद्धि लंबे समय तक जारी रह सकती है।

600 रुपये प्रति टन बढ़ सकती हैं स्टील की कीमतें

रेल माल भाड़े में हुई 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर अन्य वस्तुओं पर भी पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस वजह से बाजार में स्टील के दाम में 600 रुपये प्रति टन की वृद्धि हो सकती है क्योंकि उन्हें कच्चे उत्पाद के ट्रांसपोर्ट पर अब ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा।

वहीं, रेल माल भाड़े में बढ़ोतरी की वजह से उर्वरक सब्सिडी बिल में भी 200 करोड़ रुपए सालाना की वृद्धि होगी। हर साल 44 मिलियन टन उर्वरक देश भर में ट्रांसपोर्ट होता है। इनमें से करीब 80 फीसदी रेल के माध्यम से ही भेजा जाता है। सरकार ने अंतरिम बजट में उर्वरक सब्सिडी 67,970 करोड़ रुपए रखी है।
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रसोई तक पहुंचे सकती है महंगाई की आंच

मोदी सरकार नए बजट में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। बताया जा रह है कि सिलेंडर की कीमतों में 10 रुपए मासिक की दर से बढ़ोतरी की जाएगी।

फिलहाल सब्सिडी के साथ एक सिलेंडर की कीमत 414 रुपए है और बिना सब्सिडी के 905 रुपए। मोदी सरकार 7,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी में कटौती करने के लिए 10 रुपए मासिक वृद्घि की सिफारिश कर सकती है।
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