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मोदी राज में संघ का बोलबाला, कर रहा है सरकारी नियुक्तियां?

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अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने केंद्र सरकार की नियुक्तियों में दखल देने की हर संभव कोशिश की। भाजपा की नई सरकार में भी उसने पुराना ढर्रा बरकरार रखा है।
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केंद्र सरकार की नीतियों को तय करने में औपचारिक रूप से संघ नेताओं की कोई भूमिका नहीं है, लेकिन उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर सभी सरकारी संस्थानों में अपने करीबियों को बैठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्ष केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद संघ के आला नेताओं और समर्थक बुद्घिजीवियों ने कई बैठकें कीं। उन बैठकों में सरकारी संस्थानों के 1200 पदों की पहचान की गई और ये तय किया गया कि उन पर संघ समर्थकों को बैठाया जाएगा। उन संस्थानों में अधिकांश शैक्षणिक और संवैधानिक संस्थान शामिल हैं।
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सांसदों की सिफारिशें भी जा रही संघ के पास

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, बीजेपी सासंदों को विशेष रूप से ताकीद की गई है कि वे सरकारी संस्‍थानों, पैनल, और कमेटियों में नियुक्ति के लिए सीधे नामों की स‌िफारिश ना करें, बल्‍कि ऐसे सुझाव भाजपा की स्‍थानीय या राज्य इकाई को भेजे जाएं। भाजपा के सदस्य उस प्रस्‍ताव पर संघ के संबंधित नेताओं से चर्चा करने के बाद ही प्रस्‍तावित नामों को हरी झंडी देंगे।

बीजेपी के एक सांसद ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया, 'हमारी सिफारिशें बीजेपी की जिला इकाई के जरिए केंद्रीय इकाई को भेजी जाती है। उसके बाद संघ और पार्टी के संगठन सचिव द्वारा इसे आगे बढ़ा दिया जाता है।'

एक अन्य सांसद ने बताया कि इस समय सांसद खुद केंद्रीय विद्यालयों में एडमिशन तक के लिए सिफारिश नहीं कर सकते। ऐसी सिफ‌ारिशें भी उन्हें पार्टी से चर्चा करने के बाद करनी होती है।

संघ के ये नेता ही दे रहे सिफारिशों को हरी झंडी

सूत्रों के मुता‌बिक, बीजेपी के संगठन सचिव राम लाल, संघ के संयुक्‍त सचिव कृष्‍ण गोपाल और दत्‍तात्रेय होसबोले, वे अहम लोग हैं जिनके पास नियुक्तियों की सभी सिफारिशें भेजी जा रही हैं। जांच के बाद ही वह उन सिफारिशों पर सहमति की मुहर लगा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सरकार के कामकाज मे आरएसएस के हस्तक्षेप को लेकर विपक्ष बीजेपी पर हमेशा ही हमलावर रहा है। विपक्ष का आरोप रहा है कि संघ अपने लोगों का अकादमिक संस्‍थानों और निकायों में भर रहा है। हाल-‌फिलहाल की कई नियुक्तियों के कारण ये विवाद और‌ तेज हुआ है।

इं‌डियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR) और ‌फिल्म टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में की गई नियुक्ति हंगामे का सबब रही हैं। इन नियु‌क्तियों के कारण सरकार की तीखी आलोचना हो रही है।
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फिर भी संघ को नहीं आलोचनाओं की चिंता

हालांकि संघ ऐसी आलोचनाओं से कतई परेशान नहीं हैं। उसने हाल ही में नागपुर के चंद्रकांत घाटोरे को सेंसर बोर्ड  का सदस्य बनवाया। घाटोरे संघ से जुड़े हुए है। ये नियुक्ति तब की गई, जबकि संघ से ही जुड़े गजेंद्र चौहान की FTII चेयरमैन पद पर नियुक्ति के कारण विवाद हो रहा है।

संघ समर्थक सदस्यों की नियुक्ति पर संघ के ही एक नेता ने कहा कि क्या हमसे ये उम्‍मीद की जा रही है कि हम कांग्रेस और लेफ्ट के लोंगों की नियुक्ति करेंगे? ये बहुत ही आम बात है जो पार्टी सत्ता में आती है, वह ऐसे लोगों को अहम पदों पर बैठाती है, जो उसकी‌ विचारधारा के करीब होते हैं।

उन्होंने कहा‌ कि सरकार के अधिकांश मंत्री भी संघ की पृष्ठभूमि से हैं, इसमें बुराई क्या है? माना जा रहा है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद संघ 30 से अधिक पदों पर अपने कर‌ीबियों की नियु‌क्ति करा चुका है।
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