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हार के लिए मोदी, शाह और जेटली जिम्मेदारः शौरी

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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे और कभी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले अरुण शौरी ने कहा है कि बिहार चुनाव के नतीजे पार्टी के मुंह पर करारा तमाचा हैं।
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उन्होंने कहा है कि इस हार के लिए उन्हीं तीन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए जो जीत के लिए श्रेय लेते। उन्होंने तीन नेताओं के रूप में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अरुण जेटली का नाम लिया।

चुनाव परिणामों पर एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी कहा है कि पार्टी और सरकार को तीन नेता चला रहे हैं- नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अरुण जेटली। इनमें से किसी के हटने की संभावना भी नहीं है क्योंकि वे नरेंद्र मोदी के साथ ही आए हैं, यह बाइ वन गेट टू फ्री है।"
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उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को अपने कामकाज का ढंग बदलना चाहिए और यह सोचना छोड़ना चाहिए कि मैं अजेय और अपराजेय हूं।

'भाजपा नेतृत्व में आ गया है अहंकार'

इस सवाल पर कि क्या पार्टी नेतृत्व में अहंकार आ गया है, अरुण शौरी ने कहा, "यही तो मैं कह रहा हूं, कोई सुनने को तैयार नहीं है। सांसद और विधायक मुझे आकर बताते हैं कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से मिलने के लिए दो-तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। फिर कोई बात कहें तो उसकी ठीक से सुनवाई नहीं होती।" हालांकि उन्होंने नरेंद्र मोदी के बारे में कहा कि वे लोगों से बड़े प्यार से मिलते हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री के बारे में भी उन्होंने बहुत सी तीखी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को चुनाव के अलावा भी कुछ सोचना होगा। जिन परियोजनाओं के बारे में बात की गई थी वे शुरु नहीं हुईं, मंत्री काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि सब कुछ प्रधानमंत्री के कार्यालय में केंद्रित हो गया है।

उनका कहना है, "दो तीन प्रोजेक्ट खड़े कर देने से या एक सरदार पटेल की मूर्ति खड़ी कर देने से, जो चीन में बन रही है, कुछ नहीं होगा।"

क्या प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता कम हुई है?

तो क्या प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता कम हुई है? इस सवाल उन्होंने कहा, " प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता कम की गई है। वे चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से कह रहे हैं कि कालाधन वापस आने के बाद हर मतदाता के खाते में 15-20 लाख आ जाएंगे और पार्टी का अध्यक्ष कह रहे हैं कि वह एक चुनावी जुमला था। अगर प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता कम होगी तो बिहार में सवा लाख करोड़ के पैकेज पर लोग क्यों न सोचें कि यह कहीं चुनावी जुमला तो नहीं है।"

पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि वे नहीं जानते कि नरेंद्र मोदी के पास सूचनाएं पहुंच भी रही हैं या नहीं। उन्होंने दादरी के मसले पर उनकी चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी चुप्पी ठीक नहीं है। राजनाथ सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री हर मसले पर नहीं बोल सकते, लेकिन जिस समय वे ट्विटर पर नवजोत सिंह सिद्धू से लेकर एक गवर्नर को जन्मदिन की बधाई देने तक हर विषय पर बोल रहे थे तो इस एक मसले पर क्यों नहीं बोल सकते थे?

बिहार के चुनाव पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से पार्टी चल रही है उसमें बदलाव लाना होगा क्योंकि प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ पिछले एक साल से असहयोग आंदोलन चल रहा है। आप कहीं भेज दीजिए तो चले जाएंगे लेकिन काम नहीं करेंगे।

उनका कहना है कि दिल्ली के चुनावों में भी ऐसा ही हुआ था, कोई 130 सांसदों को बुलवा लिया गया लोग बैठे रहे चाय पीते रहे लेकिन किसी ने कोई काम नहीं किया। उनका कहना है कि बिहार में भी कई मंत्रियों को बुलवा लिया गया लेकिन उन्हें काम दिया नहीं गया।
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'प्रशांत किशोर से होती रही चर्चा'

अरुण शौरी ने बताया कि नीतीश कुमार के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की उनसे चर्चा होती रही है और प्रशांत किशोर ने उन्हें बताया कि मंत्रियों के रहने खाने का ढंग से इंतजाम तक नहीं किया गया था।

उन्होंने बिना नाम लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सलाह दी कि हर जगह जीतना है, सब कुछ जीतना है और सब को खत्म कर देना है की प्रवृत्ति को खत्म करना होगा। अभी जीत लेते हैं, बाकी बाद में ठीक कर दूंगा की प्रवृत्ति को रोकना होगा।

अरुण शौरी ने कहा, "आप लोकसभा चुनाव में 31 प्रतिशत वोट लेकर आए थे। इसका मतलब है कि 69 प्रतिशत तो फिर भी आपके साथ नहीं थे। ऐसे में अगर आपकी वजह से वो 69 प्रतिशत आपके खिलाफ एक हो जाते हैं तो इसका नुकसान तो होगा।"

उनकी राय थी कि आने वाले चुनावों में भी यदि विपक्ष एक हो जाता है तो इसका पार्टी को नुकसान होगा।

संघ प्रमुख के आरक्षण पर दिए गए बयान से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "हो सकता है कि उनके बयान का असर हुआ होगा। लेकिन उन्होंने जो कहा क्या वो अनजाने में कहा यह बीजेपी को सोचना होगा। हो सकता है कि उन्हें जीत हार से खास मतलब न हो। उनका अपने जबान पर बहुत संयम है, उन्होंने जो कहा सोच समझकर कहा होगा।"

सरकार की आर्थिक नीतियों के बारे में उन्होंने कहा, "अरुण जेटली से कुछ नहीं होगा. वे वकील हैं और वे किसी के भी पक्ष में खड़े होकर कुछ भी बोल सकते हैं।"
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