महाराष्ट्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने वाले विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया को गिरफ्तार करने पर फैसला नांदेड़ पुलिस को करना है।
तोगड़िया ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में उनके खिलाफ दर्ज मामला वोट बैंक की राजनीति को दर्शाता है। हालांकि भाजपा ने मामले में सावधानी पूर्वक बयान देते हुए कहा कि इसे अकबरुद्दीन ओवैसी की गिरफ्तारी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए।
22 जनवरी को नांदेड़ में दिए गए भड़काऊ भाषण के मामले में कार्रवाई में हो रही देरी पर सफाई देते हुए महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने कहा, ‘हम आगे की कार्रवाई करने से पहले कानूनी सलाह ले रहे हैं। ऐसा हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना नहीं चाहते।’
उन्होंने कहा कि जब भी इस तरह के भड़काऊ भाषण के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित पुलिस अधिकारी को बयान जांचने को कहा जाता है और जरूरी होने पर मामला भी दर्ज किया जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही है। नांदेड़ पुलिस को उनके भाषण में आपत्तिजनक सामग्री में मिली है और इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया है। अब जांच अधिकारी यह फैसला लेगा कि तोगड़िया को गिरफ्तार करना चाहिए या नहीं।
इसी बीच भाजपा ने कहा कि कानून को अपना काम करना चाहिए और इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं होनी चाहिए। भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘इस केस को अकबरुद्दीन ओवैसी के भड़काऊ भाषण से नहीं जोड़ना चाहिए। यह सही नहीं होगा। सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए कि ओवैसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, इसलिए तोगड़िया के खिलाफ भी केस दर्ज होना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि ओवैसी ने देश के खिलाफ जंग छेड़ने का काम किया था। अगर तोगड़िया के भाषण में छोटा मामला बनता भी है, तो कानून अपना काम करेगा। तोगड़िया ने इलाहाबाद से जारी एक बयान में कहा, ‘मुझे जानबूझकर झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है ताकि राम मंदिर समेत हिंदुओं को लेकर अन्य मुद्दों से देश का ध्यान हटाया जा सके।’