महाराष्ट्र के रण में विदर्भ और मुंबई दो ऐसे क्षेत्र रहे, जिसके बलबूते भाजपा सत्ता के दरवाजे तक पहुंची है। पश्चिम महाराष्ट्र, जिसे एनसीपी का गढ़ कहा जाता है वहां भी भाजपा ने जोरदार एंट्री मारी है। इसके साथ ही पुणे मतलब पवार का फार्मूला भी फेल हो गया।
पश्चिम महाराष्ट्र के बाद भाजपा ने मराठवाड़ा और खानदेश में भी बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कोकण की आठ सीटों पर भाजपा की दाल नहीं गल सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू का ही असर रहा कि भाजपा शिवसेना के आमची मुंबई के नारे की हवा निकालते हुए विदर्भ और मुंबई से कांग्रेस के वर्चस्व को भी तोड़ दिया।
हालांकि एनसीपी के सरदारों ने अपना गढ़ कायम रखा, जिससे पवार की लाज बची। मुंबई की राजनीति में भाजपा ने शिवसेना के वर्चस्व को खत्म कर मुंबई- ठाणे -रायगढ़ और पालघर की 76 सीटों में से 25 सीटों पर विजय प्राप्त की है।