बनारस में कांग्रेसी उम्मीदवार अजय राय को समर्थन का ऐलान करने वाले दबंग नेता मुख्तार अंसारी के लिए अच्छी खबर है। कौमी एकता दल के नेता अब जेल से बाहर निकल रहे हैं।
मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी ने हाल में संवाददाता सम्मेलन कर जानकारी दी थी कि कौमी एकता दल ने कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने का मन बनाया है, क्योंकि वही नरेंद्र मोदी को रोक सकते हैं।
कौमी एकता दल के टिकट पर पिछली बार चुनाव लड़ने वाले मुख्तार अंसारी यूं तो हार गए थे, लेकिन मुरली मनोहर जोशी की जीत का अंतर काफी कम रहा था।
चुनाव प्रचार के लिए मिली कस्टडी पेरोल
विधायक मुख्तार अंसारी मकोका के तहत दर्ज एक मामले में इन दिनों मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन पर आरोप है कि वो एक संगठित आपराधिक समूह का सदस्य है।
दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें लोकसभा चुनावों में प्रचार करने के लिए दस दिन की कस्टडी पेरोल दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने अंसारी के हक में फैसला सुनाया।
वो फिलहाल कौमी एकता दल के टिकट पर घोसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी ओर बनारस सीट पर वो अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी अजय राय को समर्थन दे रहे हैं।
घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं अंसारी
घोसी सीट के लिए मतदान 12 मई को होना है। अदालत ने अंसारी की तरफ से दायर याचिका पर फैसला सुनाया। उन पर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप है। यह मामला 2005 का है।
अंसारी का कहना था कि उन्हें चुनाव प्रचार करने के लिए पेरोल की जरूरत है। उत्तर प्रदेश की मऊ सीट से मौजूदा विधायक अंसारी पर मकोका के तहत मामला दर्ज है।
उन पर आरोप है कि वो सह आरोपी प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की अगुवाई में चलने वाले संगठित आपराधिक समूह के सदस्य हैं।
मकोका के तहत और हत्या का मामला जारी
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने अक्टूबर 2009 में बजरंगी को गिरफ्तार किया था। उन्होंने दक्षिण दिल्ली के कारोबारी अशोक टेबरीवाल को कथित तौर पर 1 करोड़ रुपया देने के लिए धमकाया था। उनकी टेलीफोन बातचीत टैप हो गई थी।
पुलिस ने अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जो बजरंगी का करीबी है। इसके अलावा 2005 का हत्या का मामला उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया।
कृष्णानंद राय की पत्नी अल्का राय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह आग्रह किया गया था, जिसके बाद यह मामला दिल्ली भेज दिया गया।