मध्य प्रदेश की सरकार ने किन्नरों को बराबरी का दर्जा देने के लिए ‘समग्र किन्नर बोर्ड' बनाने का फैसला किया है।
इस बोर्ड का मकसद किन्नरों की पहचान करके उन्हें सरकारी प्रमाण-पत्र देना है ताकि वो दूसरे लोगों की तरह सरकारी नौकरियों और अन्य योजनाओं का लाभ ले सकें।
मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि राज्य में लगभग 20 से 25 हज़ार किन्नर हैं लेकिन इस बारे में पुख्ता आंकड़े नहीं हैं।
सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त वीके बाथम ने बताया, “किन्नरों की समस्याओं को हम जानना चाहते है ताकि इस बोर्ड के जरिए हम उन्हें दूर कर सकें। ये एक प्रयास है उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने का।”