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किन्नर: 'कि' लिखने से जिंदगी बदलेगी?

Sun, 17 Aug 2014 01:10 PM IST
शुरैह नियाजी/भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम
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मध्य प्रदेश की सरकार ने किन्नरों को बराबरी का दर्जा देने के लिए ‘समग्र किन्नर बोर्ड' बनाने का फैसला किया है।
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इस बोर्ड का मकसद किन्नरों की पहचान करके उन्हें सरकारी प्रमाण-पत्र देना है ताकि वो दूसरे लोगों की तरह सरकारी नौकरियों और अन्य योजनाओं का लाभ ले सकें।

मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि राज्य में लगभग 20 से 25 हज़ार किन्नर हैं लेकिन इस बारे में पुख्ता आंकड़े नहीं हैं।

सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त वीके बाथम ने बताया, “किन्नरों की समस्याओं को हम जानना चाहते है ताकि इस बोर्ड के जरिए हम उन्हें दूर कर सकें। ये एक प्रयास है उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने का।”
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बदलेगी किन्नरों ज‌िंदगी

राज्य सरकार ने एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजा है जिसमें मांग की गई है कि जिस तरह से पुरुषों और महिलाओं के नाम के आगे ‘श्री’ और ‘श्रीमती’ का उपयोग किया जाता है वैसे ही किन्नरों के नाम के आगे ‘कि’ का उपयोग किया जाए।

पहली बार मध्य प्रदेश ने ही देश में किन्नर को विधायक चुना था। शबनम मौसी साल 2000 में सुहागपुर से विधायक चुनी गई थीं। हालांकि किन्नरों को इन फैसलों से बदलाव की बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं है।

भोपाल की किन्नर पिंकी का कहना है, “सरकार नई-नई घोषणा करती है लेकिन हमारी ज़िंदगी वैसी ही रहती है। हम भी सम्मानजनक तरीके से ज़िंदगी जीना चाहते है। आख़िर कब तक हम लोगों के आगे हाथ फैला कर जिएंगे।”
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