‘बीमार’ महाराष्ट्र के विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टर की भूमिका निभाने का वादा किया है। शनिवार को नई मुंबई में विशेष आर्थिक जोन (सेज) के उद्घाटन मौके पर प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के बीच विकास को लेकर हुई जुगलबंदी में मोदी ने डॉक्टर के रूप में राज्य को ठीक करने का आश्वासन दिया।
चुनाव के मुहाने पर खड़े महाराष्ट्र में मोदी का यह शॉक ट्रीटमेंट चव्हाण के लिए जोर का झटका रहा। मोदी ने शनिवार को मुंबई में आईएनएस कोलकाता युद्धपोत राष्ट्र को समर्पित करने के बाद नई मुंबई के रायगढ़ जिले में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्र्स्ट (जेएनपीटी) के समीप न्हावासेवा में 4000 करोड़ रुपये की लागत वाली सेज परियोजना की शुरुआत की।
यह समुद्री किनारे से सटे राज्यों के लिए शुरू सागरमाला प्रोजेक्ट की महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
CM चव्हाण को मोदी का शॉक ट्रीटमेंट
उन्होंने सेज के निर्माण में आ रही बाधाओं को हटाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को अपना एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल गठित करने का अधिकार दिया जाएगा।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने सोलापुर में ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ चव्हाण ने भी मंच साझा किया। चव्हाण ने पहले गुजरात की तुलना में महाराष्ट्र को नंबर वन बताते हुए मोदी को छेड़ा और फिर राज्य में ठप पड़ी सेज परियोजनाओं, कोयला और गैस के मुद्दे पर मोदी से सहयोग मांगा।
चूंकि नई मुंबई में बोलने का समय नहीं मिला इसलिए मोदी ने इसका जवाब उन्हें सोलापुर में दिया। मोदी ने कहा कि चव्हाण को पहले से इसकी चिंता थी लेकिन वे बोल नहीं सकते थे।
बीमारी पुरानी हो तो इलाज के लिए डॉक्टर की जरूरत पड़ती है। अब डॉक्टर मिल गया है। केवल महाराष्ट्र ही नहीं देशभर की समस्या का निराकरण होगा।
'बिजली बचाना भी देश है'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिजली बनाने से बड़ा काम बिजली बचाना है और यह भी एक तरह की देश सेवा है।
कुछ लोग सोचते हैं कि देश सेवा के लिए एमएलए या एमपी बनना जरूरी है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली पैदा करना महंगा काम है लेकिन इसे आसानी से बचाया जा सकता है और इससे एक बड़ा परिवर्तन आ सकता है।
इससे सबसे ज्यादा हमारे परिवार लाभांवित होंगे। इसे हमें निश्चिततौर पर राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझना चाहिए।