मंजूनाथ अपने कत्ल के साढ़े आठ साल बाद अब बड़े पर्दे पर आकर आपसे सवाल करने जा रहा है कि क्या ईमानदार होना गुनाह है? क्या आम आदमी को मिलावट और घटतौली का विरोध नहीं करना चाहिए?
खास बात है कि तेल माफिया के खिलाफ लड़ाई में जान गंवाने वाले दक्षिण भारतीय युवक मंजूनाथ षडमुगम पर बनी इस फिल्म में ज्यादातर किरदार लखनऊ और आसपास के हैं।
फिल्म के निर्देशक संदीप ए वर्मा ने फोन पर ‘अमर उजाला’ को बताया कि फिल्म की ज्यादातर शूटिंग लखनऊ से लखीमपुर के बीच की गई है।
भ्रष्टाचार से लड़ते हुए गंवाई जान
फिल्म के माध्यम से बिहार के जांबाज इंजीनियर सत्येंद्र दुबे और उन उच्च शिक्षित युवाओं को याद किया जाएगा, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जान गंवाई। नौ मई को रिलीज हो रही फिल्म मंजूनाथ का मुख्य किरदार एक नया कलाकार निभा रहा है।
याद है ना मध्यवर्गीय परिवार का वो मंजूनाथ, जिसने हर कदम संघर्ष के बाद आईआईएम-लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए किया था।
जिसने यूपी के पिछड़े इलाके लखीमपुर-खीरी में अपने काम से समाज को बदलने का सपना देखा था। लेकिन, बदले में इंडियन ऑयल कारपोरेशन के इस मार्केटिंग अफसर को ऐसी मौत मिली, जिसकी चर्चा से ही आंख भर आती है।
निर्देशक संदीप वर्मा कहते हैं कि तेल माफिया की जो दहशत उन्होंने खुद देखी, उसकी बदौलत फिल्म की शूटिंग भी एक काल्पनिक नाम रखकर की गई।
मां चाहती है, बेटे की बहादुरी पर गर्व करे देश
महज 27 साल की उम्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में कुर्बानी देने वाले मंजूनाथ की मां चाहती हैं कि दुनिया उनके बेटे को पढ़ा-लिखा इडियट नहीं, अपने सिद्धांत पर शहीद होने वाले बहादुर के रूप में जाने।
मां ने निर्देशक को बताया कि मंजूनाथ को घर के पास बंगलूरू में ही नौकरी का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने तेल में मिलावट के खेल को बेनकाब करने की लड़ाई से पीछे हटने से इनकार कर दिया।