लोकसभा और चार विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस हाईकमान पार्टी में बड़े बदलाव करने को तैयार है, लेकिन यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल में सरकार और संगठन में बड़े पदों पर रहे नेताओं को यह रास नहीं आ रहा। लिहाजा पार्टी में मौकापरस्त राजनीति हावी हो रही है।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि संगठन में फेरबदल होने से पहले जयंती नटराजन जैसे कई पुराने वफादार बगावत कर सकते हैं।
पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक अगले एक से दो महीनों में हाईकमान के खिलाफ और भी चेहरे सामने आ सकते हैं। ये वही लोग हैं जिन्हें हाईकमान लचर प्रदर्शन के चलते दोबारा संगठन में जगह देने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन ये लोग संगठन में बड़ा पद पाने की लालसा में हैं।
उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं पुराने वफादार
खुद पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ऐसे कई पुराने वफादारों को सक्रिय भूमिका देने के सख्त खिलाफ हैं। आशंका है कि खुद की उपेक्षा से नाराज ये नेता यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं, पार्टी में कुछ ऐसे भी हैं, जो इसे समय का चक्र मानते हुए दूसरों को जगह देने के लिए अपना पद छोड़ने को तैयार हैं। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित तौर पर तारीफ करना भी इसी फेरबदल से मची उथल-पुथल का नतीजा माना जा रहा है। पार्टी के एक महासचिव ने कहा है कि सालों से सत्ता में रहने के बाद कुछ लोगों को हमेशा पावर में रहने की आदत हो गई है। अब जब कुर्सी हाथ से जा रही है, तो विवादित बयानों की झड़ी लग रही है।
पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, संदीप दीक्षित, विजय बहुगुणा, नारायण राणे, कुमारी सैलजा, जयंती नटराजन, कैप्टन अमरिंदर सिंह और अजित जोगी समेत कई नेताओं के नाम कांग्रेस मुख्यालय में उन लोगों में गिने जा रहे हैं, जो आने वाले दिनों में अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं।