भारत सरकार के मंत्रालयों में कामकाज की रीढ़ माने जाने वाले केंद्रीय सचिवालय सेवा कर्मियों को अपने मूल अधिकारों के लिए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही उम्मीद है। कार्मिक विभाग के शीर्ष नौकरशाहों की हठधर्मिता की वजह से केंद्रीय सचिवालय के 2200 से ज्यादा कर्मचारी पदोन्नति के साथ ही वेतन विसंगतियों के शिकार हैं। इन सभी को उम्मीद है कि पीएमओ उनकी भी सुध लेगा लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है।
केंद्रीय सचिवालय के इन कर्मियों ने पत्र के जरिए पीएमओ और कैबिनेट सचिव को अपनी भावनाओं से अवगत कराया है। साथ ही न्याय की गुहार लगाने के लिए पीएम से मिलने का समय भी मांगा है। ये कर्मचारी एक जून को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर नौकरशाही के जरिए हो रही नाइंसाफी की दास्तां को बयान करेंगे।
हमें अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है
केंद्रीय सचिवालय सेवा कर्मियों की मांग है कि उनके खंड क के कर्मियों को भी संगठित सेवाओं के खंड क के प्रमोटी अधिकारियों की तरह वेतन एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं। इनका मानना है कि ऐसा करने से समान वेतन पाने वाले समान स्तर के कर्मचारियों के बीच एकरूपता सुनिश्चित होगी।
केंद्रीय सचिवालय सेवा फोरम के महासचिव राकेश कुमार ने कहा कि हम लोगों के साथ हो रहे भेदभाव को अगर जारी रखा जाता है तो यह जाति प्रथा को बढ़ावा देने सरीखा कदम है। यदि हमें खंड क के सेवा में शामिल कर लिया गया है तो हमें अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
दरअसल केंद्रीय सचिवालय सेवा के 2200 कर्मचारियों को भेदभाव का शिकार इसलिए होना पड़ रहा है कि 1990 में एक कार्यालय ज्ञापन के जरिए कार्मिक विभाग ने केंद्रीय सिविल सेवा के शेड्यूल में शामिल 45 सेवाओं में से अधिकांश को तो खंड क की सेवा में मान लिया है मगर केंद्रीय सचिवालय सेवा को इस श्रेणी से बाहर रखा है।
शीर्ष नौकरशाही के वजह से उनके भी कदम नहीं बढ़ रहे
जबकि कार्मिक विभाग की सचिव ने खुद अपने पत्रों में इस सेवा को पूर्व से संगठित सेवा माना है। बताया जा रहा है कि कार्मिक विभाग के मंत्री जितेंद्र सिंह भी केंद्रीय सचिवालय सेवा के कर्मचारियों की मांग को जायज मान रहे हैं लेकिन विभाग की शीर्ष नौकरशाही के वजह से उनके भी कदम नहीं बढ़ रहे हैं।
अब इन कर्मचारियों की उम्मीद पीएम मोदी पर टिकी है। इस सेवा के कर्मचारी केंद्र सरकार के मंत्रालयों में अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव, निदेशक, उप निदेशक और उप सचिव सरीखे अहम पदों पर काबिज हैं।