अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहतरीन तालमेल के बावजूद निकट भविष्य में इसकी कम ही संभावना है कि देश में कोई बड़ा निवेश देखने को मिले। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर अमेरिकी सीईओ और अधिकारियों ने भारत सरकार और पीएम मोदी के सामने देश में निवेश के रास्ते में मौजूद कई अड़चनों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।
इन अड़चनों में कई लाइसेंस हासिल करना, लालफीताशाही, सहयोग न करने वाली नौकरशाही, परियोजनाओं की मंजूरी में देरी, अस्थिर कर व्यवस्था, सुस्त श्रम सुधार, भ्रष्टाचार के साथ ही राज्य सरकारों का असहयोग भी शामिल है।
दोनों नेताओं के बीच बनी केमिस्ट्री का असर भविष्य में भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों के रूप में परिलक्षित हो सकता है लेकिन निवेश को लेकर हाल फिलहाल कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला। ओबामा के साथ दौरे पर आए शीर्ष अमेरिकी सीईओ और अधिकारियों ने मोदी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को निवेश के रास्ते में आने वाली बाधाओं से अवगत कराया है।
साथ ही इन्होंने इस बारे में भारत-अमेरिकी बिजनेस सीईओ फोरम के दौरान बंद कमरे में हुई बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को भी जानकारी दी। यहां तक कुछ सीईओ ने तो इस बारे में पीएम को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा आयोजित भोज में बताया था।