प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महंगाई पर लगाम और खाद्य सुरक्षा को लेकर गुरुवार को केन्द्रीय मंत्रियों के साथ बैठक की। जिसमें मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गयी और मूल्य वृद्धि की निगरानी करने का फैसला किया गया।
प्रधानमंत्री ने रेल किराया, गैस एवं तेल कीमतों की वृद्धि और मानसून की बारिश कम होने से सूखे की आशंका को देखते हुये अपने आवास पर यह बैठक बुलायी।
जिसमें वित्त मंत्री अरूण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान शामिल हुए।
बैठक में मोदी के साथ चार केंद्रीय मंत्री
बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेल किरायों में वृद्धि, तेल एवं गैस की कीमतों में बढोतरी चीनी मूल्यों में वृद्धि को देखते हुए महंगाई पर इसके असर की समीक्षा की।
उन्होंने इस साल मानसून की बारिश कम होने के कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए कृषि उत्पादन की भी समीक्षा की। साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून के क्रियान्वयन के बारे में भी विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री ने संबद्ध मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे स्थिति पर नजर रखें और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उपायों पर विचार करें। किसी भी तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिये तुरंत कड़े कदम उठाए।
फूड सिक्योरिटी एक्ट पर सख्त सरकार
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस मूल्य वृद्धि का प्रतिकूल असर जनता पर नहीं पड़े और किसी तरह की कालाबाजारी नहीं हो। उन्होंने महंगाई को रोकने के लिये संबद्ध मंत्रालय को आपस में समन्वय कर स्थिति की निगरानी करने का भी निर्देश दिया।
बैठक के बाद खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान सामने आए। उन्होंने बैठक में लिए फैसलों की जानकारी दी। पासवान ने बताया, "फूड सिक्योरिटी एक्ट लागू होगा। सरकार बीज-खाद पर सब्सिडी जारी रखेगी। बारिश से बचाने के लिए अनाज का संरक्षण किया जाएगा। फूड सिक्योरिटी को लेकर राज्य सरकार से बात की जाएगी। केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राज्य सरकार को पत्र लिख कर उनसे सहयोग मांगेगी। पूरे देश में खाद्य सुरक्षा योजना को तेजी से लागू किया जाएगा।"
राज्यों को 3 महीने का समय
उन्होंने कहा, "जिन राज्यों में खाद्य सुरक्षा कानून लागू नहीं हुआ है, उन्हें आने वाले तीन महीने में इस अहम कानून को लागू करने के लिए कहा जाएगा। यह कानून 5 जुलाई 2013 से लागू है। सितंबर में इस संबंध में अध्यादेश जारी हुआ था। सभी राज्य सरकारों से कहा गया था कि वे 365 दिन के भीतर इसको लागू कर दें। लेकिन कुछ ही राज्यों ने इसे लागू किया है।"
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, "इस मुद्दे पर बैठक में चर्चा की गई, जिसमें इस योजना की अवधि को तीन महीना और बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस दौरान राज्य सरकारों से इसे लागू करने को कहा जाएगा।"