केंद्र की राजनीति में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा अंततः पूरी हो गई। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी को पार्टी की शीर्ष संस्था संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल किया है।
लगभग तीन दिनों की कवायद के बाद घोषित हुई टीम में मोदी का दबादबा स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जबकि यशवंत सिन्हा, शिवराज सिंह चौहान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेताओं को किनारे लगा दिया गया है।
हिंदुत्व की ओर भाजपा
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 'सुशासन संकल्प, भाजपा विकल्प' का नारा देकर सत्ता में आने की तैयारी कर रही भाजपा की नई टीम सुशासन की ओर न जाकर हिंदुत्व की ओर लौटती दिख रही है।
राजनाथ की नई टीम में मोदी के करीबी अमित शाह को महासचिव बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
गौरतलब है कि शाह शोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में आरोपी हैं। इसके अलावा भी उनके ऊपर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पार्टी के युवा और हिंदूत्ववादी चेहरे वरूण गांधी को भी महासचिवों की टीम में जगह दी गई है। वरुण गांधी हाल ही में भड़काऊ भाषण के मामलों में बरी हुए हैं।
राजनाथ की टीम में मंदिर आंदोलन के जमाने की फायरब्रांड नेता उमा भारती को भी शामिल किया गया है।
राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी समेत अन्य हिंदुत्ववादी चेहरों को राष्ट्रीय टीम में शामिल कर ये संकेत देने की कोशिश की है कि भाजपा एक बार फिर मंदिर और हिंदुत्व के मुद्दे उठाने के मूड बना रही है।
पार्टी ने 2004 लोकसभा चुनावों के बाद से ही इन मुद्दों का हाशिये पर डाल दिया था। लेकिन 2014 लोकसभा चुनावों में वे इन मुद्दों को उठा सकते हैं।
जनवरी में महाकुंभ में आयोजित विश्व हिंदु परिषद की बैठक में राजनाथ सिंह ऐसे संकेत भी दे चुके हैं।
मोदी की स्वीकार्यता
तीन महीने पहले राजनाथ सिंह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद से ही मोदी को केंद्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की चर्चा जोरों पर थी।
राजनाथ ने कई मौकों पर मोदी को अधिक तवज्जो देकर पार्टी में उनका कद बढ़ाने के प्रयास भी किए थे। पार्टी के एक धड़ा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के मांग भी कर रहा है।
मोदी को संसदीय बोर्ड में शामिल किए जाने के बाद ये मांग फिर जोर पकड़ सकती है। भाजपा 2014 लोकसभा चुनावों की प्रचार की रणनीति भी मोदी को ही केंद्र में रखकर तैयार कर सकती है।
अमर उजाला संवाददाता हरिश लखेड़ा के मुताबिक, 'मोदी की कार्यकर्ताओं में स्वीकार्यता है। पार्टी 2014 लोकसभा चुनावों में उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल करेगी।'
वैसे संसदीय मोदी में मोदी को छह वर्ष बाद दोबारा शामिल किया गया है।
इससे पहले भी वे पार्टी के संसदीय बोर्ड में शामिल थे। हालांकि राजनाथ ने ही उन्हें यह कहते हुए बोर्ड से बाहर कर दिया था कि अन्य मुख्यमंत्री भी बोर्ड के सदस्य नहीं हैं।
जिन्हें नहीं मिली जगह
राजनाथ सिंह की टीम में यशंवत सिन्हा औरा शत्रुघ्न सिन्हा को जगह नहीं दी गई है। पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल किया गया है।
हालांकि उनकी टीम के अन्य सदस्यों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई है।
नई टीम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी जगह नहीं मिली है, जबकि उन्हें मोदी के साथ संसदीय बोर्ड में शमिल किए जाने की चर्चा थी।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को भी टीम से बाहर रखा गया है।
राजनाथ सिंह ने जिन नेताओं को अपनी टीम में शामिल नहीं किया है, वे कमोबेश उदार छवि के नेता हैं। आने वाले समय में ये उनके लिए नई चुनौती बन सकते हैं।
राजनाथ सिंह इस चुनौती से कैसे निपटेंगे ये देखना दिलचस्प होगा।