प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्क सम्मेलन को संबोधित किया लेकिन पहली ही बार में उन्होंने जो असर छोड़ा उसने बताया कि भारत, सार्क देशों को एक सही नेतृत्व देने की भूमिका निभा सकता है।
वैसे तो प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी अब तक कई विदेश यात्राएं कर चुके हैं। दुनियाभर के तमाम प्रभावशाली नेताओं और वहां की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर वे भूटान गए थे और सार्क सम्मेलन में नेपाल की उनकी ये दूसरी यात्रा है।
एशिया के बाहर के देशों में उन्होंने लोकप्रियता के नए प्रतिमान गढ़े हैं लेकिन अपने घर में भी वे एक प्रभावी नेता के तौर पर तेजी से उभर रहे हैं। सार्क सम्मेलन में इसकी साफ झलक दिखाई दी। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही बातों पर जिससे मोदी सब पर पड़ गए भारी।
अंग्रेजी में भी प्रभावी भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी में धारा प्रवाह बोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन सार्क सम्मेलन में उन्होंने अपना भाषण अंग्रेजी में दिया।
बाकी नेता उन्हें जितने ध्यान से सुन रहे थे उससे लग रहा था कि अंग्रेजी में भी वो अपनी बात को प्रभावी ढंग से कम्युनिकेट कर पाए। शेख हसीना से लेकर श्रीलंकाई राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे तक सब उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे थे।
हालांकि इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने माथे पर हाथों की दो उंगलियां लगाए दिखे। हो सकता आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को घेरना नवाज शरीफ को अच्छा नहीं लगा।
मौके पर उठाया 26/11 का मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी मौके को बखूबी निभाना अच्छी तरह जानते हैं। चाहे तमाम विदेश यात्राओं में जनता के साथ रूबरू होने के मिले मौके हों या फिर कोई राजनीतिक मंच।
सार्क सम्मेलन में भी उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत बहुत ही सधे तरीके से की। पड़ोसियों को पडो़सी धर्म की सीख देने के बाद उन्होंने सबसे संवेदनशील मुद्दा उठाया आतंकवाद का।
ये संयोग ही था कि सार्क सम्मेलन का आगाज उस दिन हुआ जिस दिन मुंबई में कभी न भूलने वाला दर्द भारत को मिला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों के सामने पाकिस्तान को नसीहत दी। इसे एक तरह से भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा सकता है।
'हम पास भी हैं और साथ भी'
प्रधानमंत्री ने कहा कि पास होने से साथ होने की ताकत अनेक गुना हो जाती है। नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि पाकिस्तान को छोड़कर दूसरे सार्क देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंध कहीं बेहतर हैं।
भारत और बांग्लादेश सड़क, रेल और ऊर्जा के क्षेत्र में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। नेपाल के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। भूटान के साथ संबंध पहले से और अधिक प्रगाढ़ हुए हैं लेकिन पाकिस्तान के साथ संबंधों में एक गतिरोध बना हुआ है।
मोदी ने कहा एकजुट प्रयासों की जरूरत जितनी दक्षिण एशिया को है, उतनी शायद दुनिया में कहीं नहीं। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और बैंकॉक की यात्रा करने की तुलना में सार्क देशों में फोन पर बात करना कही ज्यादा महंगा है। एक तरह से पाकिस्तान को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि हम अगर एकदूसरे की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील हों तो क्षेत्र में ज्यादा स्थायित्व और विकास संभव हो सकेगा।
व्यापार और कनेक्टिविटी की बात
नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों में व्यापार और कनेक्टिविटी की समस्या के बारे में कहा, ''एक पंजाब से दूसरे पंजाब में सामान पहुंचने में कराची और दुबई से भी कई गुना समय और धन खर्च होता है। हमें व्यापार के सीधे रास्तों का इस्तेमाल करना चाहिए।"
मोदी ने कहा, "भारत में आधारभूत संरचना पर काम करना मेरी प्राथमिकता है। हमें अपनी सारी प्रक्रियाओं और अड़चनों और वीजा को आसान बनाना होगा ताकि सार्क देशों के बीच व्यापार बढ़े।"
प्रधानमंत्री मोदी ने सार्क देशों के लिए पांच बिंदुओं का अपना विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में व्यापार, निवेश, सहायता, सहयोग, कनेक्टिविटी के जरिए लोगों के बीच बेहतर संपर्क बढ़ना चाहिए।