चुनावी मौसम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता जयंती नटराजन के पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर सीधे हमले से भाजपा खुश है तो इस मामले में सरकार ने कड़े तेवर दिखाए हैं। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से जुड़ी उन फाइलों की जांच की घोषणा की है, जिसके बारे में जयंती ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर दखलअंदाजी का आरोप लगाया है। भाजपा ने भी व्यंग्य करते हुए कहा कि जयंती के आरोपों ने साफ कर दिया है कि यूपीए सरकार की जिस फैक्ट्री में घटिया नीति तैयार होती थी, उस फैक्ट्री के सुपरवाइजर राहुल ही थे।
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि हस्तक्षेप के आरोप वाली फाइलों की मंत्रालय समीक्षा करेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी यूपीए कार्यकाल के दौरान मंजूर और खारिज की गई पर्यावरणीय परियोजनाओं की समीक्षा की मांग की। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने राहुल पर लगे आरोपों को बेहद संगीन बताया और कहा की इस मामले में मुकदमे की संभावना तलाशने के लिए वह आरोपों का अध्ययन कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जयंती ने शुक्रवार को राहुल पर उनके पर्यावरण मंत्री रहते नीतियों और योजनाओं में दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। भाजपा जयंती के पार्टी में शामिल होने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं कर रही है।
जेटली का कांग्रेस पर तीखा हमला
पूरे मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और यूपीए सरकार के दौरान पर्यावरण मंत्रालय के फैसले और अपनाई गई सभी नीतियों की समीक्षा की मांग की। जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार के लिए जो महत्वपूर्ण था, वह था नेताओं की मर्जी के अनुसार किसको पर्यावरणीय मंजूरी दी जाए और किसको नहीं दी जाए। इसी कारण देश का न केवल विकास दर प्रभावित हुआ, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में वृद्धि भी कम हुई। इस मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता सांबित पात्रा ने कहा कि यूपीए सरकार में सत्ता के कई केंद्र होने के आरोप की लगातार पुष्टि हो रही है। अब उस दौरान मंत्री रही नटराजन ने इस आशय का आरोप लगा कर साफ कर दिया है कि भाजपा का आरोप महज राजनीति से प्रेरित नहीं था।
क्या वासन के साथ जाएंगी नटराजन
सोनिया गांधी को भेजे पत्र ने जयंती नटराजन ने लिखा है कि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीके वासन के पार्टी छोड़ने के वक्त अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से मोतीलाल वोरा का उनके पास फोन आया। वोरा ने उनसे पूछा कि वासन के फिर तमिल मनीला कांग्रेस (टीएमसी) शुरू करने के बारे में वह क्या सोच रही हैं।
गौरतलब है कि नब्बे के दशक में नजराजन टीएमसी में थीं, जिसका बाद में कांग्रेस में विलय हो गया। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आंतरिक संकट से जूझ रही प्रदेश कांग्रेस को झटका देने के लिए वह वासन के साथ जा सकती हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की भी प्रदेश इकाई के साथ नहीं बन रही है। कार्ति के भी वासन के साथ जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
जयंती के कार्यकाल के मामलों में सीबीआई ने दर्ज की तीन पीई
सीबीआई ने पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के कार्यकाल में कुछ कंपनियों को दी गई पर्यावरण संबंधी मंजूरी की जांच के लिए तीन ताजा प्रीलिमनरी इंक्वायरी (पीई) दर्ज की हैं। इन मामलों में स्पष्टीकरण के लिए जांच एजेंसी नटराजन को जल्द बुलावा भी भेज सकती है। इसके साथ ही इन मामलों में सीबीआई की ओर से दर्ज पीई की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
हालांकि एजेंसी इस महीने दर्ज की गईं पीई के बारे में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुई है। इस बारे में पूछे जाने एजेंसी के संयुक्त निदेशक (नीति) आरएस भाटी ने कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने पिछले साल अक्तूबर में दो पीई दर्ज की थीं। सूत्रों ने बताया कि नटराजन के कार्यकाल में पर्यावरण संबंधी दी गई मंजूरी को लेकर सीबीआई ने मंत्रालय के कई अधिकारियों से पूछताछ की है।
एजेंसी ने राज्य सरकार के अधिकारियों से भी पूछताछ की और पूरे दस्तावेजों को परखा है। एजेंसी नटराजन से यह जानना चाहती है कि उन्होंने किस आधार पर कुछ फाइलों को मंजूरी दी और कुछ को रोक कर रखा। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने वह पत्र भी हासिल कर लिया है, जिसमें नटराजन के पूर्ववर्ती जयराम रमेश ने कुछ कंपनियों को पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने को लेकर सवाल उठाए हैं।