लोकसभा में लगातार जारी हंगामे और गतिरोध के बीच 27 सांसदों को लोकसभा स्पीकर ने सस्पेंड कर दिया है। इन सांसदों को पांच दिन के लिए लोकसभा से निलंबित किया है।
सदन में प्ले कार्ड लाने और वेल में आकर हंगामा करने के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने ये कार्रवाई की है।
निलंबित सांसदों में ज्यादातर सांसद कांग्रेस के बताए जा रहे हैं। जिन सांसदों के नाम फिलहाल सामने आ रहे हैं उनमें दीपेंद्र हुड्डा, मुनियप्पा, निनॉन्ग इरिंग, गौरव गोगोई, अधीर रंजन चौधरी, बीएन चंद्रप्पा, अभिजीत मुखर्जी, एमके राघवन, वेनुगोपाल, रवनीत बिट्टू, सुष्मिता देव, संतोख चौधरी, अबू हसेम खान चौधरी, आर ध्रुवनारायण, बीवी नायक, सुरेश कोडिकुनिल के नाम शामिल हैं।
इस बीच लोकसभा में जारी हंगामे को देखते हुए सदन की कार्रवाई दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई है। नियम 374 A के तहत ये कार्यवाही की गई है।
कांग्रेस ने फैसले को बताया अलोकतांत्रिक
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन द्वारा की गई कार्रवाई कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे एकतरफा कार्रवाई करार दिया है। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने इसे अलोकतांत्रिक बताया है। उन्होंने कहा कि जो हुआ वो ठीक नहीं है।
राजीव शुक्ला ने आगे कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं निष्काषित सांसद निनॉन्ग इरिंग ने कहा कि मैडम ने कहा हम ज्यादा प्ले कार्ड दिखाते हैं, आप देख सकते हैं लोकसभा टीवी पर, ऐसा कुछ नहीं दिखाया गया।
निनॉन्ग इरिंग ने आगे कहा कि लोकसभा स्पीकर सदन की गार्जियन हैं अगर वो गलत करेंगी तो गलत संदेश जाता है। हम इस फैसले के खिलाफ 5 दिनों तक प्रदर्शन करेंगे।
कांग्रेस ही नहीं टीएमसी ने भी इस कार्रवाई की विरोध किया है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम लोकसभा स्पीकर के फैसले का विरोध करते हैं। हम इस मुद्दे पर कांग्रेस के समर्थन में हैं।
हालांकि भाजपा पूरी तरह से लोकसभा स्पीकर के साथ है। भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को सही करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये फैसला बेहद मजबूरी में लिया गया।
संसद में हंगामे का दौर जारी
संसद के मानसून सत्र में बीते दो हफ्ते से चल रहा गतिरोध सोमवार को भी जारी रहा। सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी विपक्ष मानने को तैयार नहीं दिखा। सोमवार को भी संसद में कांग्रेस के सांसद लोकसभा में काली पट्टी बांध कर सदन में पहुंचे।
इस सबके बीच ललित मोदी के मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। राज्यसभा में शोर-शराबे के बीच अपने अधूरे जवाब में सुषमा ने कहा कि मैंने ललित मोदी का किसी भी तरह से सहयोग नहीं किया।
उन्होंने खुद पर लग रहे आरोपों को बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि वो हमेशा चर्चा के लिए तैयार हैं। ललित मोदी को वीजा दिलाने में उनका कोई योगदान नहीं है। हालांकि वो अपना जवाब पूरा नहीं कर सकी इससे पहले ही राज्य सभा की कार्रवाई स्थगित हो गई।
वहीं सुबह 11 बजे जैसे ही राज्य सभा की कार्रवाई शुरू हुई 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ये मुद्दा उठाया। जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर हंगामा नजर आया।
सर्वदलीय बैठक में नहीं बनी बात
इससे पहले लोकसभा की कार्रवाई शुरू होते ही देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के चलते लोगों की हुई मौत पर दो मिनट का मौन रखा गया। इसके बाद जैसे ही कार्रवाई आगे बढ़ी एक बार फिर से सदन में 'वी वांट जस्टिस' के नारे गूंजने लगे। लगातार शोर-शराबे के बीच कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जो बेनतीजा रही। 12 बजे से शुरू हुई बैठक में सरकार की मंशा बातचीत के जरिए विपक्ष को मनाने की थी लेकिन उसमें कामयाबी नहीं मिली।
बता दें कि मानसून सत्र के दौरान ललितगेट और व्यापम घोटाला मामले में हंगामे के कारण राज्यसभा में कामकाज ठप है, जबकि लोकसभा में हंगामे के बीच कुछ सरकारी कामकाज ही निपटाए जा सके हैं।