न खाऊंगा और न खाने दूंगा के दावे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का वादा किया है। उनके कार्यकाल के 100 दिनों में इस दिशा में कुछ कदम चलने की आहट जरूर दिखी है, लेकिन अभी सख्त और बड़े कदमों का इंतजार है।
मसलन मोदी ने जहां अपने सांसदों को यह नसीहत दी है, कि वह ट्रांसफर ,पोस्टिंग की सिफारिश लेकर न आए, इसी तरह सरकारी बाबुओं पर अंकुश लगाने के लिए फैसलों में पारदर्शिता लाने के शुरूआती पहल की है।
इसके बावजूद देश में भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर,लोकपाल के लिए उठी आवाज को अमलीजामा पहनाने की दिशा में मोदी सरकार ने पहले 100 दिन में एक भी कदम नहीं बढ़ाया है। जबकि इस मामले में उच्चतम न्यायालय भी सरकार से सवाल पूछ चुका है।
लोकपाल का इंतजार
देश में भ्रष्ट्राचार के खात्मे की उम्मीद बन चुका लोकपाल, नई सरकार के गठन के 100 दिन बीत जाने के बाद भी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहा है।
हालत यह है कि सरकार की गंभीरता पर उच्चतम न्यायालय ने भी सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि अगर नेता विपक्ष की नियुक्ति नहीं की जाएगी, तो लोकपाल का चयन कैसे होगा।
कानून में लोकपाल के चयन समिति में विपक्ष के नेता को सदस्य बनाया गया है। भ्रष्ट्राचार की अहम कड़ी माने जाने वाले सरकारी बाबुओं को पीएम लाल किले से लेकर सार्वजनिक सभाओं में नसीहत दे चुके हैं।
इन्हें सेवा के जज्बे से काम करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कुछ कदमों के जरिए काम-काज में पारदर्शिता लाने की पहल की है।
मंत्रालयों को जल्द से जल्द ई-ऑफिस में तब्दील करना, लाल-फीताशाही की पहचान बन चुकी फाइलों की ई-फाइलिंग करना इस दिशा में उठाया गया कदम है।
पोस्टिंग में सिफारिश नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्ट्राचार की एक प्रमुख जड़ जिसमे सिफारिशों के आधार पर लोगों की ट्रांसफर और पोस्टिंग की जाती है। उस सिस्टम को बदलने की कोशिश की है।
इसी के तहत अपने सांसदों को उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह इस तरह की सिफारिशें न लाएं। साथ ही कार्यकाल के पहले 100 दिन में वरिष्ठ बाबुओं का ट्रांसफर न करना भी इस बात का संदेश है कि सरकार काम के आधार पर आंकलन करना चाहती है।
इस कदम को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दशा में मोदी सरकार द्वारा उठाया गया कदम जरुर कहा जा सकता है। फिर भी इस कदम के बाद और भी बहुत सारे कड़े कदम उठाने की जरुरत है।
देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें किसी से छिपी नहीं हैं। इन पर काबू लाने के लिए मोदी सरकार को कुछ हट कर करके तो दिखाना ही होगा तब जाकर वह लोगों में संपूर्ण विश्वास हासिल कर पाएंगे।
जन-धन योजना की सफलता असली इम्तिहान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी महत्वाकांक्षी जन-धन योजना की शुरूआत जोर-शोर से करा दी है। जिस तरह पहले दिन ही 1.84 करोड़ से ज्यादा खाते खुले उसे देखते हुए 7.5 करोड़ खाते खोलने का लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा।
मोदी सरकार की असली परीक्षा इन खातों के जरिए लोगों को नकद सब्सिडी, मनरेगा का वेतन पहुंचाना आदि होगा। जिसे यूपीए सरकार नहीं कर पाई। ऐसे में अगर इन कदमों पर मोदी सरकार सफल होती है, तो भ्रष्ट्राचार पर सीधे आम आदमी को राहत पहुंचाई जा सकेगी।