आंध्र प्रदेश में भाजपा और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) नेता सीट बंटवारे पर वार्ता कर रहे हैं। हालांकि यहां भाजपा नेताओं को ‘मोदी फॉर पीएम’ अभियान पर इतना भरोसा है कि वे चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सीटों के बंटवारे संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
इनमें से कुछ भाजपा नेता केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव डाल रहे हैं कि सीटों के बंटवारे में लोकसभा की कुल 42 और विधानसभा की 294 सीटों में से 50 फीसदी से कम सीटों का समझौता टीडीपी के साथ न किया जाए।
लेकिन राज्य के कुछ नेता सुझाव दे रहे हैं कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू को सीमांध्र के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाए।
सफलता की उम्मीद में भाजपा
हालांकि वेंकैया नायडू ने टीडीपी के साथ चल रही गठबंधन वार्ता से खुद को दूर ही रखा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली इस वार्ता का मार्गदर्शन कर रहे हैं। साथ ही पार्टी के महासचिव प्रकाश जावडेकर भी तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं के संपर्क साधे हुए हैं।
चंद्रबाबू नायडू भाजपा को केवल 12 लोकसभा और 39 विधानसभा सीटें देना चाहते हैं, जबकि भाजपा इससे ज्यादा की उम्मीद कर रही है। वेंकैया सीमांध्र क्षेत्र से ही ताल्लुक रखते हैं।
भाजपा आंध्र में तेलुगु अभिनेताओं का साथ मिलने से उत्साहित है। अभिनेता पवन कल्याण और नागार्जुन का पार्टी को समर्थन मिला है। कई और स्टार भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। टीडीपी और भाजपा के बीच सीट बंटवारे वार्ता संबंधी खबरों ने कांग्रेस की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
तेलंगाना भाजपा का कड़ा रुख
तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने इस मामले में कड़ा रुख अपना रखा है, वह टीडीपी को ज्यादा सीटें दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।
उनको पक्का भरोसा है कि मोदी फैक्टर और भाजपा का छोटे राज्यों के गठन के प्रति समर्थन तेलंगाना क्षेत्र की 17 लोकसभा सीटों तथा 119 विधानसभा सीटों पर पार्टी को जबरदस्त फायदा पहुंचाएगा।
हालांकि रेड्डी ने बुधवार को कहा कि वह चल रही प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं डाल रहे हैं।
सीमांध्र में है साथी की जरूरत
भाजपा को सीमांध्र क्षेत्र में मजबूती के लिए साथी की जरूरत है। वह यहां टीडीपी का साथ के बिना मजबूत चुनावी जंग लड़ने की स्थिति में नहीं है।
इस क्षेत्र में ज्यादातर लोगों का मानना है कि आंध्र के बंटवारे में भाजपा ने कांग्रेस के साथ ‘फिक्सिंग’ कर ली थी, तभी संसद में संबंधित बिल पास हो सका।
हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी के एनडीए के नेतृत्व वाले समय में टीडीपी गठबंधन की मजबूत सदस्य थी। उस समय टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू एनडीए के संयोजक भी रहे। हालांकि बाद में उन्होंने नरेंद्र मोदी पर सांप्रदायिक नेता होना का भी आरोप लगाया।