जब से लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान शुरू हुआ, नरेंद्र मोदी देश भर में घूम रहे हैं। कुछ दिन पहले उनकी चुनावी रैलियों की तादाद सौ का आंकड़ा पार कर चुकी थी और मतदान के अंतिम चरण तक वो इसी धुआंधार रफ्तार से प्रचार करने वाले हैं।
लेकिन इतने व्यस्त कार्यक्रम और हर रोज अलग-अलग राज्यों में जा रहे मोदी को अपने घर की कोई खास याद नहीं आती। इसकी वजह है। दरअसल, वो कितनी भी रैलियों को संबोधित करें, कहीं भी हों, लेकिन रात अपने घर में ही गुजारते हैं।
और यह सब मुमकिन होता है कि उनके हवाई बेड़े की मदद से, जिसमें एक जेट विमान और दो हेलिकॉप्टर शामिल हैं। जाहिर है, रोजमर्रा की थकान के बाद अगर घर लौटना है, तो वो हवाई सफर के जरिए ही मुमकिन है।
तय किया 2.4 लाख किलोमीटर का फासला
नरेंद्र मोदी अब तक देश भर में 150 से ज्यादा रैलियों को संबोधित कर चुके हैं और उन्होंने करीब 2.4 लाख किलोमीटर सफर किया है। औसत रूप से देखें, तो यह हर रोज 1,100 किलोमीटर के करीब बनता है।
जानकारों का मानना है कि हवा में वक्त गुजारने के मामले में वो सभी नेताओं से आगे हैं और उनके बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नंबर आता है, जो कांग्रेस की तरफ से कमान संभाले हुए हैं।
कमोबेश हर रोज मोदी अहमदाबाद एयरपोर्ट से ईएमबी-135बीजे एम्ब्रायर विमान में सवार होकर रैलियों को संबोधित करने के लिए निकलते हैं। यह विमान कर्नावती एविएशन का है, जो अडानी समूह की कंपनी है।
हेलिकॉप्टर रोका, तो गुस्साए मोदी
टीओआई के मुताबिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल के एक अधिकारी ने कहा, "हम मोदी के विमान की रोज दो मूवमेंट रिकॉर्ड करते हैं। वो रैलियों को संबोधित करने के लिए देश के किसी भी हिस्से में क्यों न जाएं, घर जरूर लौटते हैं।"
हाल में मोदी के हेलिकॉप्टर को दिल्ली में दो घंटे के लिए डीजीसीए की ओर से उड़ान भरने की इजाजत नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोला था।
तभी से मोदी ने छोटे फासले तय करने के लिए भी विमानों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। एटीसी के अधिकारी ने कहा, "नेता आम तौर पर उन जगहों तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं, जहां बड़े विमान नहीं जा सकते।"
जेट विमान का खर्च 3 लाख प्रतिघंटा
पिछले कुछ दिनों में नरेंद्र मोदी अगस्ता एडब्ल्यू-139 में सफर कर रहे हैं, जो डीएलएफ ग्रुप का है। वो उत्तर भारत, खास तौर से उत्तर प्रदेश और बिहार में रैलियों में जाने के लिए यही चॉपर इस्तेमाल कर रहे हैं।
एटीसी के अधिकारियों के मुताबिक मोदी ने बेल 412 हेलिकॉप्टर में भी सफर किया है। जानकारों के मुताबिक सिंगल इंजन वाले हेलिकॉप्टर में सफर करने का खर्च 70-75 हजार रुपए प्रतिघंटे के करीब होता है, जबकि डबल इंजन चॉपर के मामले में यह कॉस्ट बढ़कर 1-1.2 लाख रुपए प्रतिघंटे पहुंच सकती है। इसके अलावा जेट विमान का खर्च करीब 3 लाख रुपए प्रतिघंटे है।
चुनावी मौसम में राजनीतिक दल और नेता हेलिकॉप्टर और बिजनेस जेट का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं, जिससे देश भर में फैले 130 एयर चार्टर सर्विस ऑपरेटरों को मोटा मुनाफा हो रहा है।
नेताओं ने खर्च किए 400 करोड़
उद्योग के सूत्रों के मुताबिक कैम्पेन के लिए चार्टर प्लेन पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बिजनेस एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के सचिव आर के बाली ने कहा कि सेक्टर में पिछले दो साल से 2 फीसदी की नेगेटिव ग्रोथ थी, लेकिन अभियान शुरू होने के बाद इसमें रफ्तार आई है।
बाली ने कहा, "एयर चार्टर सर्विसेज उद्योग के लिए अच्छे कारोबारी वक्त का इकलौता वक्त है।" देश में सस्ती विमान सेवाओं की नींव रखने वाले कैप्टन जी आर गोपीनाथ ने कहा कि चुनाव एयर चार्टर उद्योग के लिए बढ़िया मौसम लेकर आते हैं।
उन्होंने कहा, "हेलिकॉप्टर या बिजनेस जेट को लेकर जिस तरह का ग्लैमर, हो-हल्ला और चर्चा होती है, उससे इनका इस्तेमाल अब पहले से ज्यादा दिखने लगा है।"
यह है अहमदाबाद जाने की वजह
अब सवाल यह है कि मोदी के लिए हर रात अहमदाबाद पहुंचने की जरूरत क्या है? ऐसे में इसकी यह वजह मुमकिन है कि वो गुजरात के सीएम पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे में अपनी सरकार और उसके कामकाज से लगातार संपर्क में बने रहने के लिए ऐसा करने की जरूरत पड़ती हो। वो कह चुके हैं कि वो विमान में सफर करते वक्त ही अगले कार्यक्रम की योजना बनाते रहते हैं।
यह बात सही है कि मोदी अब भाजपा के पीएम पद के दावेदार है, लेकिन वो शायद गुजरात के सीएम की कुर्सी से तब तक जरा दूर नहीं होना चाहते, जब तक वाकई जीत तक नहीं पहुंच जाते। जाहिर है, राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता।
यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर वो पीएम बने, तो उनके बाद गुजरात सरकार की अगुवाई कौन करेगा? इसके जवाब में जो कयास तैर रहे हैं, उनमें आनंदीबेन पटेल और अमित शाह के नाम हैं। ये दोनों मोदी के करीब हैं और आपस में प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं।