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अपने ही कमरे में 10 साल तक कैद रहा ये युवक, पुलिस ने छुड़ाया

Sun, 21 Jun 2015 09:55 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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मुंबई जैसे भीड़भाड़ भरे शहर में एक युवक 10 साल तक अपने घर में कैद रहा और किसी को कानोंकान खबर तक न लगी। मुंबई के नवी मुंबई इलाके के एक मकान में कैद 22 वर्षीय राज पटेल को पुलिस ने शुक्रवार को बाहर निकाला। युवक उसी के घर ने वालों ने ही उस मकान में कैद कर रखा था।
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एक गैरसरकारी संगठन की शिकायत के बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की। राज अपने पिता के 10 बच्चों में से एक है। राज के पिता बिजनेसमैन हैं। गैर सरकारी संगठन दामिनी सेना के शारदा शाह ने बताया कि उसका परिवार बीते 22 सालों से बेलापुर स्थित संजीवनी बिल्डिंग में रह रहा था। जिस बिल्डिंग में यह परिवार रह रहा था, उस पर मुकदमा चल रहा था, जिस वजह से वहां रहने वाले सारे लोग बिल्डिंग छोड़ कर चले गए थे सिर्फ यही परिवार वहां रुका हुआ था।

शाह ने बताया कि बिल्डिंग की पानी और बिजली सब कुछ काट दी गई थी, उसके बाद भी यह परिवार यहां रह रहा था। जब पुलिस उस लड़के को बचाने पहुंची तो वो अपने सीने से एक पॉलीथीन चिपकाए हुए था और बार बार 'दादा फूड' कह रहा था। जिसके बाद उसे रेस्क्यू टीम ने खाने के लिए वड़ा पाव दिया।
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परिवार वालों पर पुलिस दर्ज नहीं करेगी केस

बेलापुर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि आखिर राज को उसके ही घर में कैद कर के क्यों रखा गया था। वहीं शारदा शाह का दावा है कि लड़के की सौतेली मां और सौतेली बहन यह चाहते थे कि लड़का परिवार से अलग रहे।

रेस्क्यू टीम ने राज को एम्बुलेन्स तक लाने के लिए वड़़ा पाव का लालच दिया और फिर उसे नवी मुंबई स्थित डीवीई पाटिल हॉस्पिटल लेकर गए। राज वहां भी लगातार 'दादा फूड' की रट लगाता रहा।

जब पुलिस उसे हॉस्पिटल लेकर जा रही थी तो उसके परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। पुलिस के मुताबिक वो अभी उसके परिवार वालों पर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं करना चाहती।
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कमरे में हर ओर अखबार और मल फैला था

पुलिस अधिकारी के मुताबिक अभी हम राज और उसके परिवार के दिमाग के संबंध में किसी मनोचिकित्सक से सहायता लेगी उसके बाद फिर किसी तरह के कार्रवाई के बारे में सोचा जाएगा।

पुलिस के मुताबिक जब वो वहां पहुंचे तो देखा कि उसका कमरा कूड़ों से भरा हुआ था। कमरे में हर ओर अखबार और मल फैला हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राज अपने कमरे में नंगा ही था, जब वो वहां पहुंचे तो वो खुद को एक बोरे से खुद को ढंकने की कोशिश कर रहा था।

कमरे में मल फैले होने के कारण पूरा कमरा बदबू कर रहा था और हम बड़ी मुश्किल से अंदर जा पाए। शारदा शाह के मुताबिक वो बाहर नहीं आता लेकिन जब हमने उसे बड़ा पाव का लालच दिया तब वो बाहर आया है और हमारी बाते मानी है।

उन्होंने बताया कि न तो किसी ने कभी इस परिवार से बात करने की हिम्मत की और न ही कोई नौवें मंजिल तक गया। शाह ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि जब किशोर था तब ही वह आखिरी बार वो अपने कमरे से बाहर निकला था। हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि आखिर पिछले 10 सालों में उसने क्या खाया?
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