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सामने आया नरेंद्र मोदी का 'धर्म-पुत्र'

Fri, 01 Aug 2014 06:30 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा के लिए जितनी बेसब्र वहां की सरकार है, उतना ही बेसब्र एक युवक भी है।
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नेपाल का जीत बहादुर और उसका परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की तैयारियां कर रहा हैं। आप सोच रहे होंगें कि जीत बहादुर को मोदी से मुलाकात में रुचि क्यों हैं?

दरअसल, बात यह है कि जीत बहादुर मोदी का धर्म पुत्र है। चौंकिए नहीं, मोदी पिछले कई वर्षों से जीत की पढ़ाई-लिखाई और रहन-सहन का खर्च उठा रहे हैं।
(फोटो सौजन्य: इंडिया टुडे)

1998 में हुई मोदी से मुलाकात

जीत बहादुर नेपाल के बहुत गरीब परिवार का युवक है। प्रधानमंत्री मोदी से उसकी मुलाकात 1998 में हुई थी।

वह मुलकात बड़ी संयोग भरी थी, लेकिन उसी के बाद मोदी ने उसकी देखभाल का जिम्‍मा ले लिया। जीत बहादुर इन दिनों अहमदाबाद में बीबीए कर रहा है।

दरअसल 1998 में एक गलत ट्रेन में चढ़ने के कारण वह गुजरात पहुंच गया था। उसने दिल्‍ली से गोरखपुर के लिए ट्रेन पकड़ी थी, लेकिन ट्रेन गोरखपुर की न होकर अहमदाबाद की निकल गई।

रोजगार की तलाश में आया था दिल्ली

नेपाल के नवलपरासी ‌जिले के लोकहा गांव में जन्मा जीत अपने बड़ा भाई दशरथ के साथ रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था।

नेपाल से हर साल काम की तलाश में सैंकड़ों युवक भारत आते हैं। उसे राजस्‍थान में काम मिल भी गया, लेकिन पसंद नहीं आया।

जीत ने कुछ ही समय बाद नेपाल वापस लौट जाने के मन बना लिया। हालांकि नसीब में कुछ और ही लिखा था। जीत गोरखपुर जाने वाली ट्रेन में बैठने के बजाय अहमदाबाद की ट्रेन में बैठ गया।

मोदी से मुलाकात के बाद बदली जिंदगी

अहमदाबाद में जीत बहादुर की मुलाकात एक म‌हिला से हुई। वह महिला उसे लेकर मोदी के पास गई। मोदी उन दिनों मुख्यमंत्री नहीं थे, लेकिन भाजपा में महत्वपूर्ण भूमिका में थे।

जीत की उम्र उस समय बहुत ही कम थी। मोदी ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली। बस फिर क्या था?

देखते ही देखते जीत की जिंदगी ही बदल गई। हालांकि इस बीच परिवार ने मान लिया कि जीत से दोबारा मुलाकात नहीं हो सकेगी और उसकी तलाश भी बंद कर दी।

नेपाल का दौरा करेंगे मोदी

जीत के मन में परिवार से मिलने के इच्छा हमेशा बनी रही। 2011 में उसकी ये इच्छा उस समय पूरी हो गई, जब फिक्की एक कार्यक्रम में नेपाली उद्योगपति विनोद चौधरी अहमदाबाद आए।

मोदी उन दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री थे और फिक्की के कार्यक्रम में वो भी गए थे। चौधरी ने मोदी को नेपाल आने का न्योता दिया।

मोदी ने उस समय चौधरी से वादा किया कि वे नेपाल जाएंगे। उन्होंने ही चौधरी से कहा कि उनके धर्म पुत्र यानी जीत के परिवार के बारे में पता करें।
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मोदी से मुलाकात को बेसब्र जीत

चौधरी ने 30 घंटों में ही जीत के परिवार के बारे में सारी जानकारियां इकट्ठा कर लीं। नतीजतन 2011 में जीत अपने घर वालों से दोबारा मिल पाया।

जीत मोदी के साथ खिंची अपनी एक तस्वीर लेकर नेपाल वापस लौट गया। तस्वीर में मोदी जीत से हाथ मिला रहे थे।

जीत ने अपने घर वालों को बताया कि मोदी ने बिल्कुल पिता की तरह उसका ध्यान रखा। मोदी नेपाल जा रहे हैं और जीत का परिवार उनसे मिलने के लिए बहुत बेसब्र है।
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