मेरठ के गंगानगर में पकड़े गए अवैध एक्सचेंज के मामले में बुधवार को बड़ा खुलासा हुआ। साइबर सेल की जांच में इस अवैध एक्सचेंज से दो माह 12 दिन में 77 हजार इंटरनेशनल (आईएसडी) कॉलिंग की पुष्टि हुई है। इनमें से अधिकांश कॉल पाकिस्तान से आनी बताई गई हैं। पुलिस अधिकारियों को अंदेशा है कि इस एक्सचेंज से आतंकी गतिविधियां का कनेक्शन था।
गंगानगर से इंटरनेशनल कॉल होने का पर्दाफाश शुक्रवार को दिल्ली संचार विभाग की टीम ने किया था। इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर अवैध एक्सचेंज से भारी मात्रा में उपकरण जब्त किए थे। दो युवकों ने हरीश और निशांत के नाम से आईडी लगाकर विशाल चौहान से ई-नेट का कनेक्शन लिया था। पुलिस ने यहां से सात एलसीडी बरामद की थी, जिनमें ट्रांसमीटर लगे थे। इनके जरिये विदेश में कॉल होती थी। अवैध एक्सचेंज से कहां कॉल होती थी? बीएसएनएल अफसर और क्राइम ब्रांच की साइबर सेल इसकी जांच में लगी थी।
बुधवार को दोनों विभागों के अधिकारियों ने पता लगाया कि आखिर कॉल कहां और किस उद्देश्य से होती थी। एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान से लगातार कॉल आती थी। अब तक की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने 72 दिनों में 64 सिम कार्ड प्रयोग किए। सभी सिम फर्जी आईडी पर लिए गए थे। इनमें से अधिकतर देवबंद से खरीदे गए थे। सिम हैदराबाद से रिचार्ज कराए जा रहे थे। आरोपियों ने 77 हजार इंटरनेशनल कॉल कर बातचीत की है। अवैध एक्सचेंज का कनेक्शन देहरादून से भी जुड़ रहा है।
रोजाना खुल रही नई परत
अवैध एक्सचेंज मामले में रोजाना नई परत खुल रही है। अब यह प्रकरण आतंकी गतिविधियों से भी कनेक्ट हो रहा है। एक्सचेंज संचालक हरीश और निशांत की आईडी फर्जी होने पर पहले दिन ही पुलिस अफसरों का शक गहराया था। उसके बाद 64 सिम मिलने की पुष्टि हुई, जिसमें पता चला कि 34 सिम देवबंद से खरीदे गए थे। सभी सिम फर्जी आईडी पर लिए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आठ सिम दिल्ली से भी खरीदे गए थे।
आखिर कौन है मास्टर माइंड:
हरीश और निशांत की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। अवैध एक्सचेंज के संचालन के पीछे आतंकियों का बड़ा हाथ हो सकता है। आखिर मास्टर माइंड कौन है, इसका खुलासा तो हरीश और निशांत की गिरफ्तारी के बाद ही होगा। दोनों आरोपियों ने मौके पर कोई ऐसा सुबूत नहीं छोड़ा है, जिसके जरिए पुलिस उन तक पहुंच सके। पुलिस अफसरों का अंदेशा है कि दोनों विदेश भाग सकते हैं।
बीएसएनएल अफसर भी संदिग्ध:
रोजाना 70 से 80 इंटरनेशनल कॉल होती थी, लेकिन बीएसएनएल अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। बीएसएनएल के अधिकारी भले ही इससे पल्ला झाड़ रहे हों कि कॉल दूसरे रूट पर होती थी, लेकिन हकीकत कुछ और है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में बीएसएनएल के एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। क्राइम ब्रांच ने तीन बार उससे पूछताछ भी की है।
एसएसपी ओंकार सिंह ने बताया कि अवैध एक्सचेंज से करीब सवा दो महीने इंटरनेशनल कॉल हुईं। क्राइम ब्रांच की टीम मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। 77 हजार इंटरनेशनल कॉल होने की बात सामने आई है। पुलिस अभी जांच में लगी है।