मैं शारीरिक रूप से बेकार हो चुकी हैं। पता नहीं जी पाऊंगी या नहीं? मुझे ऐसा नहीं लगता कि मेरा कुछ पार्ट शरीर से निकाला गया हो। लोग जानबूझकर अफवाह उड़ा रहे हैं। मुझे भीड़ से बहुत डर लगता है। कोई खाने-पीने को नहीं पूछ रहा है, बस नेता लोग आ आकर वाहवाही बटोर रहे हैं। पारिवारिक लोग भी साथ नहीं दे रहे हैं। अब ताने दे रहे हैं। भीड़ सिर्फ मुझे बदनाम करने के लिए जुट रही है। कोई ऐसा नहीं है, जो ये कहे कि वह मेरा भविष्य संवार देंगे। मैं पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती हूं।
ये वो बयान हैं, जो पीड़िता ने 164 के तहत मजिस्ट्रेट को दिया। अधिवक्ता कृष्ण पहल और प्रमोद त्यागी ने कोर्ट से धारा-164 के बयान की कॉपी प्राप्त की। उसे मीडिया को भी दिखाया गया। बयान में युवती ने कहा कि अपनी सहेली निशात के कहने पर मैंने जुलाई-2013 में मदरसे में पढ़ाना शुरू किया। मुझे एक हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे। फरवरी-2014 तक वहां पढ़ाया। मदरसे के मौलाना मुझे ऊर्दू सिखाते थे। ज्यादातर अपने धर्म की बातें बताते रहते थे। मैंने कांस्टेबल भर्ती के लिए फार्म भरा, तो पढ़ाना छोड़ दिया।
घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण परेशान रहती थी। सहेली निशात मिलती, तो कहती कि तुम इस्लाम कबूल कर लो, बहुत शांति मिलेगी। 29 जून को मैं निशात के साथ हापुड़ स्थित कॉलेज गई, तो तहसील चौराहे पर नवाब प्रधान, हाफिज सनाउल्ला और शानू मिले। वह मुझे कार में बैठाकर बुलंदशहर रोड की तरफ ले जाने लगे। रास्ते में शानू और नवाब प्रधान ने छेड़छाड़ की। विरोध पर उसके परिवार को गोली से उड़ाने की धमकी दी। फिर उसे बुलंदशहर रोड स्थित मदरसे में ले गए। वहां शानू और नवाब प्रधान ने बलात्कार किया। सनाउल्ला ने उससे अश्लील हरकतें कीं, फिर उसे तहसील चौराहे पर छोड़ दिया।
'मेरा अल्ट्रासाउंड कराया गया'
पीड़िता ने बताया कि शानू और नवाब प्रधान की धमकी की वजह से दहशत में वह परिजनों को कुछ नहीं बता पाई। फिर निशात ने उससे कहा, मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले जाऊंगी। 23 जुलाई को निशात उसे लेकर हापुड़ जा रही थी, तो बस में सनाउल्ला खां और डॉक्टर नवाब मिले। उन्होंने चुपचाप बैठने को कहा और मुझे एक बुर्का पहना दिया। वो मुझे एक लैब में ले गए। वहां मेरा अल्ट्रासाउंड कराया। मुझे शानू ने अपनी बीवी बताया। जांच के बाद महिला डॉक्टर ने कहा कि आठ दिन की प्रेग्नेंसी है और नली में फंस गई है। ऑपरेशन नहीं कराया, तो जान चली जाएगी।
उसी रात ऑपरेशन किया, कई घंटे मैं बेहोश रही। फिर 27 जुलाई को मुझे बस में बैठा दिया और मैं घर आ गई। घर वालों को तब भी कुछ नहीं बताया। 29 जुलाई को जब मैं मेडिकल स्टोर से दवा लेने जा रही थी, तो डॉक्टर नवाब और सनाउल्ला मुझे उठाकर अपने घर ले गए। रात को सनाउल्ला के घर में बंद करके रखा। वहां से हापुड़ मदरसे में ले गए। फिर हापुड़ में ही सनाउल्ला की रिश्तेदारी में ले गए। किसी से फोन पर बातचीत कर सनाउल्ला कह रहा था कि लड़की को लेकर आ रहे हैं। इसके बाद उसे गढ़ के दौताई मदरसे में ले गए, तो हाफिज ने कहा कि पहले लड़की का धर्म परिवर्तन कराओ, तब एक शपथ पत्र बनाया और उस पर मेरा नाम बुशरा जन्नत लिखवा दिया। मेरे हस्ताक्षर भी इन्होंने खुद ही कर लिए।
फिर पोपाई गांव के एक कमरे में बंद करके रखा और एक अगस्त को मुजफ्फरनगर ले गए। वहां मौलाना ने रखने से मना कर दिया, मैं बहुत रोई, तो बोले कि घबराओ नहीं, तुम्हारे जैसी और भी लड़कियां आती हैं। तीन अगस्त को मैं किस्मत से वहां से भाग निकली। मुजफ्फरनगर मदरसे में मेरी एक औरत ने पिटाई की, मैं उसे सामने आने पर पहचान लूंगी।