दिल्ली में हुए गैंगरेप मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कानून को सख्त करने के लिए विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग की है।
बसपा सुप्रीमो ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि दिल्ली में लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना समेत देशभर में महिलाओं के खिलाफ जघन्य और क्रूर अपराध जारी हैं। खासकर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। ऐसे में कानून को सख्त किए जाने की जरूरत है, जिसके लिए विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।
मायावती ने पत्र में कहा है कि सपा की नौ माह की सरकार में उत्तर प्रदेश में 1500 से भी ज्यादा दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं। ऐसी घटनाएं हमारे लिए बहुत तकलीफदेह और असहनीय हैं। पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध को लेकर बहुत गुस्सा है।
यह मुद्दा शीतकालीन सत्र में भी उठाया गया था और अब दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए कानून में संशोधन करने की जरूरत है। ताकि इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वालों को कड़ा सबक मिले। पत्र में उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री से महिलाओं को ऐसे गंदे इरादे वाले लोगों से सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा है कि अब समय आ गया है कि तत्काल महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया जाए। समाज के सभी वर्गों की चिंता बन चुके इस मुद्दे की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए तत्काल संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।
बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों को एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रही है, जिसे बसपा कभी साकार नहीं होने देगी।
बसपा ऐसे व्यक्ति को कभी प्रधानमंत्री नहीं बनने देगी जिसने गुजरात में हुए गोधरा कांड की आड़ में पूरे देश में सांप्रदायिक ताकतों को काफी हद तक मजबूत किया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने भी प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा में विधेयक को पास नहीं होने दिया।
इस विधेयक को पास कराने के लिए भी विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता है। साथ ही मायावती ने लोकसभा में विधेयक की प्रति फाड़ने वाले सपा सदस्यों को निलंबित किए जाने की मांग की है।