मोदी सरकार में रक्षा मंत्री बने मनोहर परिकर ने शनिवार को तेजी से फैसले लेने की क्षमता दिखाते हुए सेना के लिए 814 तोपों की खरीद को मंजूरी दे दी। बोफोर्स तोप घोटाले के तीन दशक बाद पहली बार रक्षा मंत्रालय इतनी संख्या में तोपों की खरीदारी करने जा रहा है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में 15750 करोड़ रुपये के इस सौदे पर मुहर लगाई गई। हालांकि वायुसेना के अवरो परिवहन विमान की जगह लेने वाले विमानों के लिए टाटा संस और एयरबस की संयुक्त निविदा पर फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है।
मंजूरी के मुताबिक तोपों को पिछले वर्ष लागू ‘खरीद व निर्माण’ नीति के तहत खरीदा जाएगा। जिसके तहत 100 तोपों को विदेश से खरीदा जा सकेगा और बाकी 714 का निर्माण भारत में ही करना होगा। खरीद के नए सिरे से प्रस्ताव जारी किए जाएंगे, जो कि सरकारी और निजी कंपनियों के लिए होंगे।
सूत्रों का कहना है कि अभी तक छह निविदाएं जारी की जा चुकी हैं लेकिन ब्लैक लिस्ट होने व अन्य कारणों से सभी को रद्द किया जा चुका है। इस प्रकार के तोपों को खरीदने की योजना पहली बार 1999 में स्थापित सेना के फील्ड अर्टिलरी रेशनलाइजेशन प्लान (एफएआरपी) के तहत रखी गई थी।
टाटा और यूरोपीय कंपनी एयरबस द्वारा संयुक्त रूप से 56 विमान वाहक पोतों के निर्माण की योजना के संबंध में परिषद ने अतिरिक्त जानकारियां मांगी है। इसके जरिए वायुसेना में अवरो विमान को हटाने की तैयारी थी।
ठीक इसी प्रकार का निर्णय 8200 करोड़ में 106 स्विस पाइल्टस से प्रशिक्षण विमान खरीदने के प्रस्ताव को लेकर भी हुआ है। खुद आईआईटी पृष्ठभूमि से आने वाले मंत्री परिकर ने खरीदारी की नीतियों में तेजी और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।