चीन को सख्त संदेश देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लद्दाख में हुई चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर भारत की गंभीर चिंताओं से अवगत कराया।
साथ ही मनमोहन ने अपने चीनी समकक्ष ली केचियांग से कहा कि सीमा पर शांति और सद्भाव नहीं रहने पर द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा।
दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक चली वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और इस दौरान विभिन्न मसलों पर साफगोई से चर्चा हुई।
चीन के प्रधानमंत्री के साथ वार्ता में मनमोहन सिंह ने सीमा मुद्दे के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे बांधों का मसला भी उठाया। इस दौरान व्यापार घाटे का मामला भी उठा।
रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने भारत पहुंचे चीनी पीएम
माना जा रहा है प्रतिनिधिमंडल स्तर की सोमवार को होने वाली अहम वार्ता से पहले दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात से आपसी समझदारी का माहौल तैयार हुआ।
ली केचियांग भारत के साथ मैत्री और सहयोग बढ़ाने के एजेंडे के साथ रविवार दोपहर यहां पहुंचे। मार्च में पद संभालने के बाद 57 वर्षीय ली की यह पहली आधिकारिक विदेश यात्रा है।
घुसपैठ के साए में होगी व्यापार की बात
दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के कुछ चुनिंदा लोग ही मौजूद थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुद्दों को स्पष्ट रूप से सकारात्मक किंतु मजबूत लहजे में सामने रखा।
यह बातचीत मेजबान मनमोहन के सरकारी आवास पर मेहमान ली को दिए गए निजी भोज के दौरान हुई। दोनों की यह मुलाकात वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 15 अप्रैल को चीनी सैनिकों द्वारा उल्लंघन करने और 19 किलोमीटर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने से उपजे गतिरोध का समाधान होने के बाद हुई है।
प्रधानमंत्री ने एलएसी पर शांति और यथा स्थिति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ली से यह भी वचन चाहा कि भविष्य में घुसपैठ जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
मनमोहन सिंह ने ली के साथ बातचीत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे तीन बांधों का मसला भी उठाया। इस मामले पर भारत ने चीन पर वाटर कमीशन बनाने या फिर मौजूदा विशेषज्ञ स्तर तंत्र (ईएलएम) के तहत वाटर मुद्दे के निपटारे के लिए अंतर सरकारी संवाद पर जोर दिया।
दोनों देशों के बीच होंगे कई करार
सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक आदान प्रदान कर कई करार होने की संभावना है। व्यापार निवेश में वृद्धि ली की भारत यात्रा का प्रमुख मुद्दा है।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार 2015 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत व्यापार संतुलन कायम करने पर जोर देता रहा है तथा भारतीय औषधि और सूचना प्रौद्योगिकी उद्यमों के लिए चीनी बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है।
भोज में शामिल हुए प्रमुख राजनीतिक नेता
चीनी प्रधानमंत्री को दिए गए भोज में कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली और माकपा महासचिव प्रकाश करात, सपा नेता मुलायम सिंह यादव मौजूद थे।
वह चीन के एक अरब 30 करोड़ लोगों की ओर से भारत की एक अरब 20 करोड़ लोगों के लिए शुभकामना लेकर आए हैं। हम द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देकर एशिया और विश्व में सकारात्मक योगदान कर सकते हैं। हम एक दूसरे से काफी कुछ सीख सकते हैं और आर्थिक विकास में परस्पर मदद कर सकते हैं।
- ली केचियांग, चीनी प्रधानमंत्री