पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी की ‘चाय पर चर्चा’ अभियान की खिल्ली उड़ाई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सिर्फ चुनाव से पहले चाय की दुकान पर बैठने में विश्वास नहीं करती।
ममता ने कहा कि भाजपा की तरह तृणमूल सिर्फ चुनाव से पहले चाय की दुकान पर ‘अड्डा’ जमाने में यकीन नहीं करती। भाजपा लोगों को चाय पिलाकर वोट मांग रही है।
दुर्गापुर में तृणमूल कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में ममता ने कहा कि आने वाले लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी की लड़ाई भाजपा, कांग्रेस और माकपा से है। इसे ध्यान में रखें। हमने कांग्रेस के कुशासन को खत्म करने के लिए तृणमूल का गठन किया था।
जंगल में बैठने से अच्छा है सड़क पर रहना
ममता ने दावा किया कि भाजपा के उलट उनकी पार्टी हमेशा से आम लोगों के करीब रही है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि कंक्रीट के जंगल में बैठने से अच्छा है सड़क पर रहना, क्योंकि यहीं से आपको लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती है।'
उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि दिल्ली और दूसरे राज्य हम पर गर्व करें। पार्टी उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और असम में भी सीटें जीतना चाहती है।’
उन्होंने केंद्र पर मनरेगा और सर्व शिक्षा अभियान का पैसा रोकने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य सरकार को इस मद में 8000 करोड़ रुपये मिलने हैं। लेकिन इनमें से 5000 करोड़ रुपये रोक कर रखे गए हैं।
बंगाल से कहीं नहीं जाने वाली: ममता
ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल की मौजूदगी चाहती हैं, क्योंकि उनके सामने बंगाल के गौरव को राज्य के बाहर दोबारा बहाल करने की चुनौती है। वह राज्य से बाहर नहीं जा रही हैं क्योंकि पार्टी को माकपा, कांग्रेस और भाजपा से लड़ना है।
ममता ने जोर देकर कहा कि वह प्रदेश की राजनीति में बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बंगाल देश को तरक्की का रास्ता दिखाएगा। साथ ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय पटल पर विस्तार की भी इच्छा जताई।
उन्होंने कहा कि वह केंद्र की मदद के बिना भी प्रदेश के विकास के लिए काम करना जारी रखेंगी। ममता ने कहा कि वह बंगाल में ही रहेंगी। वह यहां से कहीं जाने वाली नहीं हैं।