पिछले साल यूपीए का साथ छोड़ने वाली तृणमूल कांग्रेस श्रीलंका के मसले पर सरकार के साथ खड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक द्रमुक संकट के बाद कांग्रेस के संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ ने बुधवार सुबह तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी से बात की।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने ट्विटर पर अपने आधिकारिक पेज पर कहा, ‘हम तमिलों की भावनाओं के साथ हैं। लेकिन विदेश नीति पर किसी भी संकटकाल में हमेशा केंद्र सरकार के साथ खड़े हैं।’ इसका मतलब है कि यूएनएचआरसी में श्रीलंका के मुद्दे पर सरकार जो भी फैसला लेगी, वह तृणमूल कांग्रेस को मान्य होगा।
इससे पहले श्रीलंकाई तमिलों पर अत्याचार के मुद्दे पर यूपीए सरकार की उदासीनता से नाराज डीएमके के सभी पांच मंत्रियों ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने इस्तीफा सौंप दिए। मगंलवार को डीएमके ने सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी।
डीएमके के नाता तोड़ने से सियासी ‘नंबर गेम’ में घिरी सरकार ने यह कहते हुए पर्याप्त संख्या बल होने का दावा किया कि किसी दल ने सरकार के स्थायित्व को चुनौती नहीं दी है। डीएमके ने भी मंत्रियों को वापस बुलाने के बाद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने में रुचि नहीं दिखाई है।
बुधवार को इस्तीफा देने के लिए पहले डीएमके के तीन मंत्रियों एसएस पलानिमनिकम, जी गांधीसेल्वन और एस जगतरक्षकन ने और फिर एमके अलागिरी और डी नेपालियन ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। बताया जा रहा कि कैबिनेट में मंत्री अलागिरि सरकार से हटने के पक्ष में नहीं थे मगर करुणानिधि पर उनके छोटे पुत्र स्टालिन का ज्यादा असर है और स्टालिन ने यह फैसला करवाया है।
नई सियासी परिस्थितियों में वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अगुवाई में संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने मोर्चा संभालते हुए डीएमके के फैसले पर हैरानी जाहिर की। तीनों ने कहा कि नई परिस्थितियों में भी सरकार न तो कमजोर हुई है और न ही इसकी स्थिरता प्रभावित होने वाली है।
चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका पर कड़े प्रस्ताव का अनुमोदन करने का आश्वासन डीएमके को दिया था। संसद से इससे संबंधित सर्वसम्मत प्रस्ताव पेश करने की डीएमके की मांग पर भी दूसरे दलों से विचार विमर्श जारी था और डीएमके ने भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया था।
इसके बाद अचानक मंत्रियों के इस्तीफे का फैसला समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि हम अब भी कह रहे हैं कि सरकार श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रस्ताव में ठोस संशोधन पेश करेगी।
18 सदस्यों वाले डीएमके के यूपीए गठबंधन से अलग होने पर कमलनाथ ने कहा कि हमारे पास संख्या बल है। सरकार पूरी तरह से स्थिर है, कमजोर नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी दल ने सरकार के स्थायित्व को चुनौती नहीं दी है, इसलिए अपनी ओर से विश्वास प्रस्ताव लाने का तो सवाल ही नहीं उठता।
वीसीके ने भी छोड़ा यूपीए का साथ
तमिलनाडु में डीएमके के सहयोगी दल विदुथालई चिरुथईगल कची (वीसीके) ने भी बुधवार को यूपीए का साथ छोड़ दिया। इस दल का संसद में एक सदस्य है। इसके हटने के बाद यूपीए गठबंधन के सदस्यों की संख्या 232 रह गई है, जिसे बाहर से विभिन्न दलों के 50 सांसद समर्थन दे रहे हैं।
अविश्वास प्रस्ताव नहीं: भाजपा
'सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। वह अपने आप ही गिर जाएगी। सरकार के चलते रहने में जनता की कोई दिलचस्पी नहीं बची है। यहां-वहां से समर्थन का जुगाड़ कर बनी रहने वाली सरकार देश के हित में नहीं है।'
- मुख्तार अब्बास नकवी