यह पहला मौका है जब नक्सलियों ने एक साथ कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया है। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शनिवार को हुआ हमला नेताओं को निशाना बनाकर किया गया अब तक का सबसे बड़ा नक्सली हमला है।
इस हमले में एक पूर्व मंत्री और एक पूर्व विधायक की मौत हो गई जबकि एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो पूर्व विधायक घायल हैं।
प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नंदकुमार पटेल और उनके बेटे को नक्सलियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। आइए नजर डालते हैं इससे पहले कब-कब नक्सलियों ने नेताओं को निशाना बनाया।
16 दिसंबर 1999
नक्सलियों ने मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री लिखिराम कांवरे को बालाघाट जिले में निशाना बनाया। इस हमले में लिखिराम कांवरे की मौत हो गई।
1 अक्टूबर 2003
आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर नक्सलियों ने हमला किया हालांकि इसमें वो में बाल-बाल बच गए जबकि उनके तीन साथी घायल हो गए। नायडू पर यह हमला उस वक्त हुआ जब वह तिरुपति मंदिर में आयोजित किसी कार्यक्रम के लिए जा रहे थे।
2 नवंबर 2008
नक्सलियों ने पश्चिम बंगाल के शालबोनी में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान और जितिन प्रसाद के काफिले पर बारुदी सुरंग से हमला किया। हमले में ये लोग बाल-बाल बच गए।
26 सितंबर 2009
बस्तर से बीजेपी सांसद रहे बलिराम कश्यप के दो बेटों दिनेश और तानसेन पर नक्सलियों ने हमला किया, जिसमें उनके एक बेटे तानसेन की मौत हो गई।