भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर मचे हंगामे के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार 2013 के भूमि अधिग्रहण बिल में ‘मौलिक बदलाव’ पर विचार कर रही है जिससे विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में विकास की गतिविधियां सुनिश्चित की जा सकें।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्रों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, ‘किसी भी सरकार के लिए इस तरह के कानून में बदलाव लाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। आम धारणा यही है कि आप भूमि अधिग्रहण की मंजूरी न दें।’
यहां एक निजी यात्रा पर पहुंचे जेटली ने कहा कि गांवों में सड़कों के विकास, सिंचाई, विद्युतीकरण, गरीबों के लिए रहने लायक घर और रक्षा परियोजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता है। लेकिन मौजूदा कानून के प्रावधानों के तहत, कोई जमीन तब तक अधिग्रहीत नहीं की जा सकती जब तक कुछ शर्तें पूरी न कर ली जाएं।
‘इस क्षेत्र में गतिविधियां पूरी तरह रुक गई हैं। यहां तक कि रक्षा परियोजनाओं के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। यह एक चुनौतीपूर्ण काम है।
आप मुआवजा प्रणाली में बदलाव नहीं कर सकते हैं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत ढांचे और रहने लायक घरों के लिए कुछ छूट जरूरी है। हम फिलहाल इस चुनौती का सामना कर रहे हैं और देखेंगे कि संसद में इससे कैसे निपटा जा सकता है।’