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शिवसेना-BJP में ‘तलाक’ तो कांग्रेस-NCP भी होंगे अलग!

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शनिवार से महाराष्ट्र में नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन राजनीतिक दलों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। भाजपा-शिवसेना के साथ ही कांग्रेस-एनसीपी के बीच भी हालात सामान्य नहीं हैं। राज्य में सत्ताधारी और विपक्ष के गठबंधनों के बीच नाक की लड़ाई जारी है।
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स्थिति ऐसी बनी हुई है कि कांग्रेस-एनसीपी में तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक भाजपा-शिवसेना के बीच गठबंधन पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। संभव है कि भाजपा-शिवसेना में ‘तलाक’ होने के बाद कांग्रेस-एनसीपी भी एक साथ नहीं रहें। ऐसे में इस बार महाराष्ट्र का महाभारत चतुष्कोणीय हो जाएगा।

कांग्रेस-एनसीपी में 20 अगस्त के बाद सीट बंटवारे पर कोई बातचीत नहीं हुई है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दो सीटों के मुकाबले एनसीपी ने चार सीटें जीती हैं। उसके आधार पर वह 144 सीट की मांग कर रही है। इसलिए कांग्रेस-एनसीपी में कोई सहमति नहीं बन पा रही है।
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बीजेपी-शिवसेना में फंसा पेंच

2009 के चुनाव में कांग्रेस 174 और एनसीपी 114 सीटों पर लड़ी थी। कांग्रेस को 82 तो एनसीपी को 62 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस इस बार भी इसी फार्मूले पर गठबंधन चाहती है, लेकिन एनसीपी को यह मंजूर नहीं है।

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल मुंबई में हैं, लेकिन उनकी कांग्रेस के साथ सीधी बात नहीं हो रही है। शनिवार को शरद पवार की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात होगी। उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

दरअसल, दोनों दल अलग-अलग लड़ने में भी अपना फायदा देख रहे हैं। चुनावी सर्वे में कांग्रेस-एनसीपी की स्थिति दयनीय बताई गई है। इसलिए कांग्रेस-एनसीपी को सत्ता की नहीं बल्कि जनाधार बनाए रखने की चिंता हैं।
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भुजबल ने भरा अकेले लड़ने का दम

कांग्रेस-एनसीपी के कुछ नेताओं का कहना है कि जनता का मूड किसे पता है। हो सकता है कि वर्ष 1999 का इतिहास एक बार फिर दोहरा जाए और चुनाव बाद दोनों फिर से सत्ता में भागीदार बनें।

एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने शुक्रवार को अकेले चुनाव लड़ने का दम भरा। उन्होंने कहा कि अकेले लड़ने से सबको अपनी ताकत का अंदाजा लग जाएगा।

भुजबल ने कहा कि शिवसेना-भाजपा की तरह हमारा झगड़ा सामने नहीं आ रहा है, लेकिन हमारी इस पर नजर जरूर है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन पर क्या फैसला करती हैं।
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