मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले से देश में पारदर्शी शासन को एक गंभीर झटका लगा है। हाईकोर्ट का कहना है कि आरटीआई कार्यकर्ताओं को आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी हासिल करने के लिए वजह बतानी होगी।
इससे चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के खिलाफ दायर एक शिकायत संबंधी फाइल नोटिंग के खुलासे से हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को राहत मिली है।
जस्टिस एन पॉल वसंतकुमार और के रविचंद्रबाबू की डिवीजनल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को जानकारी मांगने के उद्देश्य का खुलासा करना होगा और साथ ही संतुष्ट भी करना होगा कि उसकी वजह तर्कसंगत है।
यह एक ऐसा फैसला है, जो आरटीआई कानून के तहत सूचना हासिल करने के अधिकार पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। इसकी कानूनी विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने आलोचना की है।