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बच्चों से रेप करने वालों को बना दें नपुंसक, कोर्ट की सिफारिश

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मद्रास उच्च न्यायालय ने एक फैसले में बच्चों के दुष्कर्मियों को नपुंसक बना दिए जाने की सिफारिश की है। उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में केंद्र सरकार से कहा है, 'बर्बर अपराधों के लिए सजा का बर्बर पैमाना होना चाहिए।'
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एक बच्चे के यौन शोषण के मामले के आरोपी विदेशी नागरिक की ओर से दाखिल याचिका को रद्द करते हुए जस्टिस ए किरुबाकरन ने कहा कि बच्चों के दुष्कर्म के आरोपियों को बधिया कर दिया जाए तो बच्चों के यौन शोषण के मामले में इसके 'जादुई नतीजे' होंगे।

किरुबाकरन ने कहा कि पारंपरिक कानून इतने कठोर नहीं है कि उनसे वांछित नतीजे पाए जाएं। बधिया करने का सुझाव बर्बर लग सकता है, लेकिन बर्बर अपराधों के लिए सजाओं का बर्बर पैमाना होना चाहिए।
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किरुबाकरन ने कहा कि कई इससे सहमत नहीं होंगे, लेकिन सभी को समाज की कठोर वास्तविकता को समझने और सजा के सुझाव की सराहना करने की आवश्यकता है।
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जज ने कहा, मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती अदालत

ज‌स्टिस किरुबाकरन ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'जब ऐसे अपराधों को रोकने में कानून निष्प्रभावी और अक्षम हो तो हाल के दिनों में मुल्क के कई हिस्सों में बच्‍चों सा‌थ हुए दिल दहला देने वाले भयावह सामूहिक दुष्कर्मों के मामलों में ये अदालत अपना हाथ बांधे मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।'

किरुबाकरन ने कहा कि बच्‍चों के खिलाफ यौन शोषण के मामलों में 2008 से 2014 के बीच सजा की दर महज 2.4 फीसदी रही है, जबकि बच्‍चों के खिलाफ अपराध 400 फीसदी बढ़े हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से हाईस्कूल में अनिवार्य यौन ‌शिक्षा लागू करने की सिफारिश भी की।
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