एक तरफ नरेंद्र मोदी राजनीति को अपराधियों से मुक्त बनाने का दावा कर रहे हैं, दूसरी तरफ एक एनजीओ की रिपोर्ट उनके दावे की हवा निकालती दिख रही है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा ने बड़ी संख्या में दागी प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा है।
लोकसभा चुनाव के पहले छह चरणों के लिए दाखिल प्रत्याशियों के हलफनामों का आकलन कर तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के 279 प्रत्याशियों में से 48 (यानी 17 फीसदी) पर गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।
533 प्रत्याशियों पर हत्या-बलात्कार के मामले दर्ज
कांग्रेस के 287 में से 36 प्रत्याशियों (13 फीसदी) पर ऐसे मामले हैं। आप के दस फीसदी (291 में से 29) प्रत्याशियों पर और बसपा के 12 फीसदी (318 में से 39 फीसदी) प्रत्याशियों पर गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।
इस रिपोर्ट के लिए छह चरणों में उतर रहे 5380 प्रत्याशियों के हलफनामों के आकलन किया गया। इन सभी प्रत्याशियों में से 879 पर यानी 16 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जबकि 533 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन पर हत्या, बलात्कार, लूट जैसे गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। यह कुल प्रत्याशियों का दस फीसदी है।
मोदी की वैवाहिक स्थिति संबंधी शिकायत की जांच जारी
मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस संपत ने कहा है कि चुनाव आयोग गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की वैवाहिक स्थिति संबंधी शिकायत की अब भी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम अब भी मोदी के नामांकन पत्र में दिए गए वैवाहिक स्थिति के विवरण संबंधी शिकायत की जांच कर रहे हैं।
मोदी ने वडोदरा लोकसभा सीट पर गत नौ अप्रैल को अपने नामांकन के दौरान पहली बार जशोदाबेन को अपनी पत्नी बताया था। कांग्रेस ने आयोग से की शिकायत में मोदी पर पूर्व के चुनावों में इस तथ्य को छुपाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
मोदी की वर्ष 1968 में जशोदाबेन से शादी हुई थी लेकिन दोनों इसके बाद से ही अलग रह रहे हैं। इससे पहले गुमनामी की जिंदगी गुजार रहीं जशोदाबेन शिक्षिका के पद से सेवानिवृत्त भी हो चुकी हैं। मोदी इससे पहले नामांकन के दौरान पत्नी के नाम की जगह को खाली छोड़ दिया करते थे।