16वीं लोकसभा की चुनावी पिच पर भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी रैलियों के शतकवीर बन गये हैं।
पिछले 26 मार्च से अब तक वे सौ से ज्यादा चुनावी रैलियां कर चुके हैं, जबकि डॉ. मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली समेत कई वरिष्ठ नेता अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में उलझ कर रह गये हैं, वे चाह कर भी दूसरे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के लिए नहीं जा पा रहे हैं।
हालत यह है कि पार्टी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी की रैलियां तो अभी एक दर्जन का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है। नतीजतन, भाजपा के चुनाव प्रचार का लगभग पूरा दारोमदार मोदी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के कंधों पर टिका है।
अपने-अपने क्षेत्र में उलझे भाजपा के दिग्गज
वैसे तो भाजपा की रैलियों में सबसे ज्यादा मांग मोदी की ही है, लेकिन सामाजिक समीकरणों के चलते अन्य नेताओं को भी रैलियां करने को भेजा जाता है।
ज्यादा मांग नहीं होने के बावजूद डॉ. जोशी को भाजपा उत्तराखंड भेजना चाहती है, लेकिन वे कानपुर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
कमोबेश यही हालत जेटली की है। कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें ऐसा उलझा लिया है कि वे अमृतसर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। जेटली की दिल्ली में ही मात्र दो-तीन रैलियां हो पाई।
इसी तरह सुषमा स्वराज भी मध्य प्रदेश तक सिमटी हैं। हालांकि वे कुछ समय निकाल कर उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में एक-दो रैलियों के लिए समय निकाल पाई हैं। नागपुर से चुनाव लड़ रहे पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी भी वहां मतदान के बाद ही समय निकाल पाए।
100 से ज्यादा रैलियां कर चुके हैं मोदी
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी इस बार बहुत कम रैलियां कर पा रहे हैं। वे अब तक उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में एक-एक रैलियां कर चुके हैं।
जबकि 26 मार्च से ‘भारत विजय रैली’ कर रहे मोदी अब तक 100 से ज्यादा रैलियां कर चुके हैं, अभी वे लगभग इतनी ही और रैलियां करेंगे।
राजनाथ की अब तक 85 रैलियां हो चुकी हैं। भाजपा की योजना के अनुसार ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए मोदी इस चुनाव में 295 संसदीय क्षेत्रों में 185 से ज्यादा विजय रैलियां करेंगे।